नई दिल्ली: कोरोना वायरस के कारण देश में लॉकडाउन लगा हुआा है. ऐसे में घरों में आए दिन कोई ना कोई स्पेशल डिश बन रही हैं. टेस्टी डिश बनने के कारण लोग इन दिनों कुछ ज्यादा ही खाना खा रहे हैं. जरूरत से ज्यादा खाना खाने के कारण लोगों को बदहजमी, और एसिडिटी की परेशानी भी हो जाती है. अगर आप भी अक्सर इस तरह की परेशानी से जूझ रहे हैं तो घबराइए नहीं. बदहजमी और एसिडिटी होने का मुख्य कारण होता है पाचन क्रिया का सही से काम ना करना. लॉकडाउन में लोग खा तो काफी रहे हैं लेकिन अगर उनकी फिजिकल एक्टिविटी की बात की जाए तो वह जीरो है. फिजिकल एक्टिविटी करने से पाचन क्रिया फास्ट होती है और खाना जल्दी पच जाता है. तो अगर आप चाहते हैं कि आप आगे भी रोजाना अपना मनपसंद खाते खाते रहें और आपको बदहजमी और एसिडिटी ना हो तो इसके लिए जरूरी है कि आप रोजाना 5 मिनट योग करें. आज हम आपको कुछ ऐसे योगासन के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे आपको एसिडिटी और सीने में जलन नहीं होगी.

पवनमुक्तासन- यह आसन पेट के लिए काफी फायदेमंद होता है. इस आसन को करने से गैस और पेट की खराबी से काफी मदद मिलती है. इस योग की क्रिया द्वारा शरीर से दूषित वायु को शरीर से मुक्त किया जाता है. पवनमुक्तासन का अभ्यास करने के लिए सर्वप्रथम पीठ के बल शवासन की मुद्रा में लेट जाएं. अब धीरे धीरे घुटने को मोड़कर तलवे को ज़मीन पर टिकाएं. तत्पश्चात् दोनों हाथों से घुटने को ऊपर से पकड़ें और सांस लेते हुए पैर के घुटनों को सीने से लगाएं और 10−20 सेकेंड तक सांस रोक कर रखें. इसके बाद आप घुटने को दोनों हाथों से मुक्त करें फिर सांस छोड़ते हुए पैरों को सीधा करके सामान्य स्थित में लौट आएं. इस क्रिया को 4−5 बार दोहराएं. एक−एक करके दोनो पैरो से करें.

मलासन- मल निकालते वक्त हम जिस अवस्था में बैठते हैं उसे मलासन कहते हैं. बैठने की यह स्थति पेट और पीठ के लिए बहुत ही लाभदायक रहती है. मलासन से घुटनों, जोड़ों, पीठ और पेट का तनाव खत्म होकर उनका दर्द मिटता है. इससे कब्ज और गैस का निदान भी होता है. इसे करने के लिए दोनों घुटनों को मोड़ते हुए मल त्याग करने वाली अवस्था में बैठ जाएं. फिर दाएं हाथ की कांख को दाएं और बाएं हाथ की कांख को बाएं घुटने पर टिकाते हुए दोनों हाथ को मिला दें.

भुजंगसन – इस आसन में शरीर की आकृति फन उठाए हुए भुजंग अर्थात सर्प जैसी बनती है इसीलिए इसको भुजंगासन या सर्पासन कहा जाता है. स आसन से रीढ़ की हड्डी सशक्त होती है. और पीठ में लचीलापन आता है. यह आसन फेफड़ों की शुद्धि के लिए भी बहुत अच्छा है और जिन लोगों का गला खराब रहने की, दमे की, पुरानी खाँसी अथवा फेंफड़ों संबंधी अन्य कोई बीमारी हो, उनको यह आसन करना चाहिए. इस आसन से पित्ताशय की क्रियाशीलता बढ़ती है और पाचन-प्रणाली की कोमल पेशियाँ मजबूत बनती है. इससे पेट की चर्बी घटाने में भी मदद मिलती है और आयु बढ़ने के कारण से पेट के नीचे के हिस्से की पेशियों को ढीला होने से रोकने में सहायता मिलती है. इससे बाजुओं में शक्ति मिलती है. पीठ में स्थित इड़ा और पिंगला नाडि़यों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है. विशेषकर, मस्तिष्क से निकलने वाले ज्ञानतंतु बलवान बनते है. पीठ की हड्डियों में रहने वाली तमाम खराबियाँ दूर होती है. कब्ज दूर होता है. तथा बवाशीर मे भी लाभ देता है.