मानसून (Monsoon) का मौसम सबको अच्‍छा लगता है. तेज गर्मी से राहत जो मिल जाती है. मगर इस मौसम की शुरुआत में ही लोग जिस बीमारी से परेशान हो जाते हैं वो है फ्लू.

छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, फ्लू का शिकार होते हैं. दरअसल, बारिश के कारण बार-बार बदलते तापमान का शरीर पर बुरा असर पड़ता है.

क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर्स
ज्‍यादातर डॉक्‍टर्स बताते हैं कि फ्लू का संक्रमण जानलेवा नहीं होता, लेकिन छोटे बच्चों और बुजुर्गो में इसके कारण कई समस्याएं हो सकती हैं. खासतौर पर उन लोगों पर इसका बुरा असर पड़ता है, जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली/इम्यून सिस्टम कमजोर होता है.

लक्षण
तेज बुखार, पसीना आना, कंपकंपी छूटना, लगातार खांसी, नाक बहना, शरीर में दर्द, त्वचा पर रैश होना.

कैसे होता है
इस सीजन में जिन चीजों को लोग ज्यादा छूते हैं, वहां पर रोग के जीवाणु बहुत जल्दी पनपते हैं. हवा के जरिए सांस से ये जीवाणु एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल जाते हैं. लेकिन सावधानी बरतने से फ्लू की संभावना को कम किया जा सकता है.

कैसे करें बचाव
खाना खाने से पहले हाथ धोना बहुत जरूरी है, क्योंकि ये जीवाणु शारीरिक संपर्क से फैलते हैं. नियमित रूप से व्यायाम करें, इससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं. सेहतमंद और पोषक आहार लें. स्वास्थ्यप्रद भोजन खाने से प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है.

क्या है उपचार
बुखार और शरीर के दर्द को कम करने के लिए दवाएं ली जा सकती हैं. कफ ड्रॉप खांसी से राहत देते हैं, लेकिन अगर लक्षण बहुत ज्यादा परेशान कर रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह लें. मानसून में सेकेंडरी इन्फेक्शन भी हो सकता है. ऐसे मामलों में दोस्तों, इंटरनेट की सलाह से दवाएं लेने के बजाए डॉक्टर से सलाह लें. आराम करें, कम से कम 8 घंटे की नींद लें.