नई दिल्ली: भारत की आजादी में महात्मा गांधी का अतुल्य योगदान रहा है. गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हुआ था. उनके माता-पिता का नाम पुतलीबाई और करमचंद गांधी था. अपने सादा जीवन और दृढ़ विचारों के कारण बापू ने भारत को अंग्रेजों से आजाद करवाया था. अग्रेंजों से आजादी के लिए बापू ने कई धरने किए और अनशन पर भी बैठे. बापू के जीवन की बात की जाए तो वह शाकाहारी थे और अक्सर हरी पत्तेदार सब्जियां खाया करते थे. गांधी जब London में थे तो वो Vegetarian Society का हिस्सा बन गए थे. Also Read - शाहरुख़ खान के इस ट्वीट पर सयानी गुप्ता का फूटा गुस्सा, लिखा- 'सच बोलना सीखें' 

गांधी जयंती आने में कुछ ही दिन बाकी है ऐसे में आज हम आपको महात्मा गांधी के डाइट के बारे में बताने जा रहे हैं. आइए जानते हैं कि बापू किस तरह का खाना पसंद करते थे. और उन्हें किस चीज से परहेज था. Also Read - गांधी जयंती पर राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना, बोले- मैं दुनिया में किसी से नहीं डरूंगा

चीनी से परहेज- गांधी जी को मीठा भी बहुत पसंद था. वो जलेबी और हलवे के शौकीन थे. लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने मीठा खाना भी कम कर दिया. वो चीनी का इस्तेमाल भी नहीं करते थे. Also Read - पीएम मोदी ने महात्मा गांधी और लालबहादुर शास्त्री को दी श्रद्धांजलि, कहा- इनके बताए मार्ग...

शाकाहारी- गांधीजी शुद्ध और सात्विक भोजन को ही बेहतर मानते थे. वे शाकाहारी थे और खासकर ऐसे आहार के विरोधी थे, जिसे खाने से व्यक्ति आवेशित हो जाए. गांधीजी खाने में बिना नमक और तेल की उबाली हुई सब्जियां लेते थे.

चाय-कॉफी का त्याग- अपने जीवन में एक समय में उन्होंने चाय और कॉफी तक का भी त्याग कर दिया था.

दही और छाछ का सेवन- गांधीजी अक्सर अपने आहार में दही को शामिल किया करते थे. आप भी जानते हैं कि दही और छाछ ऐसी चीज है जो लगभग हर भारतीय को पसंद होती है और लोग इसे अपने आहार में शामिल करते हैं. दही और छाछ पाचन क्रिया के लिए बेहद लाभकारी होती है. गांधी जी की पुस्तक Diet and Diet Reform के चैप्टर “फूड फैडिस्ट्स” (Food Faddists) में उन्होंने अपने भोजन के बारे में बताया. गांधी ने लिखा, मैं आमतौर पर 8 तोला अंकुरित गेहूं, मीठे बादाम के 8 तोले का पेस्ट (पतला किया हुआ) , हरे पत्ते के 8 तोले, 6 खट्टे नींबू, दो चम्मस शहद. इन भोजन को मैं दो भागों में खाता हूं. पहला भोजन सुबह 11 बजे और दूसरा शाम 6.15 बजे लेता हूं. इसमें आग पर चढ़ी हुई एकमात्र चीज पानी है. मैं सुबह में और दिन में एक बार पानी, नींबू और शहद उबालकर पीता हूं.”

महात्मा गांधी को फुल क्रीम दूध की जगह स्किम्ड मिल्क पसंद था. यह उनके व्यक्तित्व के मानवीय पक्ष को प्रकट करने में मदद करता है. लेकिन महात्मा गांधी का मानना था कि लोगों को क्या खाना खाना है ये उनपर छोड़ देना चाहिए. इसलिए उन्होंने लिखा था- सभी को खाने पर अपना प्रयोग करने दें और उनको तय करने दें कि उन्हें क्या खाना है.