नई दिल्ली: साल 2020 खत्म होने वाला है और नए साल 2021 का शानदार आगाज होने वाला है. साल 20202 कई मायनों में लोगों के लिए खराब रहा. इस साल लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा. लेकिन अब नए साल से उम्मीद की जा रही हैं कि इस साल में सब कुछ ठीक हो जाएगा. पूरी दुनिया 31 दिसंबर को पुराने को अलविदा और 12 बजे के बाद नए साल का स्वागत करती है. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर नया साल (Happy New Year 2021) जनवरी में ही क्यों आता है या साल के बाकी महीनों में नया जास क्यों नहीं मनाया जाता? आइए जानते हैं इसके बारे में-Also Read - बॉलीवुड की 'चिकनी चमेली' ने शेयर की साल की पहली तस्वीर, मैसेज ने लूट लिया फैन्स का दिल

इतिहास (New Year History) Also Read - अर्जुन कपूर के साथ रिलेशनशिप के खुलासे के बाद दिखा मलाइका अरोड़ा का 'बेफिक्रा' अंदाज

आपको बता दें कि सबसे पहले नया साल मनाने की यह परंपर ग्रिगोरियन कैलेंडर से शुरू हुई थी. इसकी शुरूआत 15 अक्टूबर 1582 में हुई. इस कैलेंडर की शुरूआत ईसाइयों ने की थी. ग्रिगोरियन कैलेंडर आने से पहले रूस का जूलियन कैलेंडर था. इसमें केवल 10 महीने ही थे. साथ ही इस कैलेंडर में क्रिसमस की तारीख भी हर साल बदलती रहती थी. अमेरिका के नेपल्स के फिजीशियन एलॉयसिस लिलिअस ने नया कैलेंडर पेश किया . इस कैलेंडर में 1 जनवरी को पहला दिन था. तभी से यह कैलेंडर पूरी दुनिया में प्रचलित हो गया. और 1 जनवरी को नया साल मनाया जाने लगा. Also Read - New Year 2020 पर विश्वभर में पैदा हुए 4 लाख बच्चे, सबसे अधिक 67,385 जन्म भारत में

भारत में नया साल

भारत में नया साल विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाता है. ज्यादातर ये तिथियां मार्च और अप्रैल के महीने में पड़ती हैं. पंजाब में नया साल बैशाखी के रूप में 13 अप्रैल को मनाया जाता है. सिख धर्म को मानने वाले इसे नानकशाही कैलेंडर के अनुसार मार्च में होली के दूसरे दिन मनाते हैं. जैन धर्म के लोग नववर्ष को दिवाली के अगले दिन मनाते हैं. यह भगवान महावीर स्वामी की मोक्ष प्राप्ति के अगले दिन से शुरू होता है.