नई दिल्‍ली: इस साल 26 जनवरी 2019 को देश अपना 70वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है. इस दिन सभी देशवासी हमारे राष्‍ट्रीय ध्‍वज यानी तिरंगे झंडे को सलाम करते हैं. तीन रंग की क्षैतिज पट्टियों के बीच नीले रंग के एक चक्र द्वारा सुशोभित ध्वज हमारी आन-बान और शान का प्रतीक है. 26 जनवरी के दिन ही भारत में संविधान लागू हुआ था. यह दिन भारत के लिए गौरव से भरा दिन होता है. सरकारी दफ्तर से लेकर प्राइवेट कंपनी तक अपने प्रांगण में 26 जनवरी के दिन ध्वजारोहण करके इस आनंद को हर भारतीय महसूस करता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये तीन रंगों वाला तिरंगा कैसे बना और कैसे इसे चुना गया. शायद कम ही लोग इस बारे में जानते होंगे. अगर आपको नही पता तो चलिए हम आप को बतातें हैं….

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राष्‍ट्रीय ध्‍वज, एक परिचय
महात्‍मा गांधी ने सबसे पहले 1921 में कांग्रेस के अपने झंडे की बात की थी. इस झंडे को पिंगली वेंकैया ने डिजाइन किया था. इसमें दो रंग थे लाल रंग हिन्दुओं के लिए और हरा रंग मुस्लिमों के लिए. बीच में एक चक्र था. बाद में इसमें अन्य धर्मों के लिए सफेद रंग जोड़ा गया. स्वतंत्रता प्राप्ति से कुछ दिन पहले संविधान सभा ने राष्ट्रध्वज को संशोधित किया. इसमें चरखे की जगह अशोक चक्र ने ली. इस नए झंडे की देश के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने फिर से व्याख्या की. 21 फीट गुणा 14 फीट के झंडे पूरे देश में केवल तीन किलों के ऊपर फहराए जाते हैं.

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तिरंगे का सफर
सन 1906 को भारत का ध्वज पहली बार फहराया गया था. जिसे स्वामी विवेकानंद की एक शिष्या निवेदिता ने बनाया था. इस ध्वज को उस वक्त फहराया गया जब बंगाल विभाजन हुआ था और उसके विरोध में कोलकाता में कांग्रेस का एक अधिवेशन चल रहा था. जहां उसके बाद वहां पर फहराया गया था. देश का पहला ध्वज तब लाल, पीले और हरे रंग था और उसमें क्षैतिज पट्टियां थीं. बीच में वंदे मातरम और उपर कमल और नीचे चांद बना हुआ था. इसके बाद दुसरे झंडे को पेरिस में फहराया गया था. उसके बाद महात्मा गांधी ने साल 1921 में अपने जर्नल यंग इंडिया में देश के राष्ट्रीय ध्वज की बात लिखी थी. इस झंडे के बीच में बापू ने चरखे को दर्शाने की बात कही थी लेकिन झंडे में दो ही रंग था, उसके बाद कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति जताई और कहा इसमें सफ़ेद रंग को भी जोड़ने को कहा उसके बाद केसरिया रंग के बीच में सफ़ेद और नीचे हरा रंग तीनों को शामिल किया गया. इस झंडे को 1931 को मोती लाला नेहरु ने स्वीकार किया लेकिन बाद में इसमें एक छोटा बदलाव किया बीच में चरखे की जगह पर 24 तीली वाली चक्र को लाया गया और तब से आज तक यह भारतीय तिरंगा हर भारतीय का अभिमान, आन-बान-शान बना हुआ है.

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