नई दिल्ली: रागी या मड़ुआ अफ्रीका और एशिया के सूखे क्षेत्रों में उगाया जाने वाला एक मोटा अन्न है. यह बहुत जल्दी पक कर तैयार हो जाता है. यह मूल रूप से इथियोपिया के ऊँचे क्षेत्रों का पौधा है जिसे भारत में कुछ चार हज़ार बरस पहले लाया गया था. रागी एक पौष्टिकता से भरा शानदार अनाज है जिसमे 6.7 प्रतिशत उच्च गुणों वाला प्रोटीन होता है. इसका मुख्य प्रयोग शिशु के खाने के पोररिज में किया जाता है. और अगर आपका बच्चा इसे पचा सके तो , थोड़े पहले से भीगे हुए सूखे मेवे के साथ मिला कर इसकी पोष्टिकता बढ़ाई जा सकती है.

रागी का ऊपरी परत पचाया नहीं जा सकता और इसलिए इस अनाज का प्रयोग करने से पहले इसके धोना चाहिए और छिलके को निकालना आवश्यक होता है. इस प्रक्रिया को करने के बाद इसे अंकुरित किया जाता है और ये खराब नहीं होता. इसलिए इसकी पोषटिकता बनी रहती है. इस अनाज का प्रयोग आप छीलकर या आटे में पीसकर या माल्ट बनाकर किया जा सकता है. प्रेग्‍नेंसी में महिलाओं को अपने आहार में रागी को शामिल करने से बहुत फायदा मिलता है और आज हम उन्‍हीं फायदों के बारे में आपको यहां बताने जा रहे हैं.

– आपको बता दें कि रागी में कैल्शियम की मात्रा काफी होती है. रागी बच्चों के दांतों और हड्डियों के विकास में मदद करता है. ये बात तो हम सभी जानते हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान शिशु को जरूरी पोषण मां से ही मिलता है. इसलिए मां के शरीर में पर्याप्‍त मात्रा में कैल्शियम होना चाहिए. जो इसे खाने से मिलता है.

– प्रेग्नेंसी में खबसे ज्यादा खतरा वजन बढ़ने का होता है. वजन बढ़ने से गर्भवती महिला को डायबिटीज, हाई ब्‍लड प्रेशर और दिल से जुड़े रोग हो सकते हैं. रागी में नैचुरल फैट होता है जो कि सेहत के लिए अच्‍छा माना जाता है और इससे वजन भी नहीं बढ़ता है.

– गर्भवती महिलाओं को अक्सर रात में नींद बहुत कम आती है. इस अवधि में यदि आप रागी का सेवन करती हैं तो आपको रात में गहरी नींद आ सकती है. इसमें मौजूद एमिनो एसिड ट्रिप्टोफैन होता है जो अनिद्रा को कम करने में मदद करता है.

-कई महिलाओं को ग्लूटेन से एलर्जी होती है और उन्हें अपने आहार में इसे शामिल करने के लिए सख्त मना किया जाता है. रागी में ग्लूटेन नहीं होता है और गर्भावस्था के दौरान रागी खाना पूरी तरह से सुरक्षित है. यदि आपको एलर्जी है तो आपको इससे बना हुआ कोई भी खाद्य पदार्थ नहीं खाना चाहिए. जिन खाद्य पदार्थों में ग्लूटेन नहीं होता है वे गर्भ में पल रहे बच्चे को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं.