नई दिल्ली: रामायण में लक्ष्मण जी जब बेहोश हो जाते हैं तो उनके जीवन को बचाने के लिए हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर आते हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर ये संजीवनी बूटी क्या है और इसकी क्या महत्वता है. लक्ष्मण जी की जान बचाने के लिए हनुमान जी जिस पर्वत को उठाकर लाए थे वह श्रीलंका में है. इस पर्वत को रूमास्सला नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि आज भी इस पर्वत पर संजीवनी बूटी पाई जाती है. Also Read - 39 साल के हुए विश्व कप नायक गौतम गंभीर; सोशल मीडिया पर फैंस ने दी शुभकामनाएं

आखिर क्या है संजीवनी बूटी Also Read - Tuesday: जानें मंगलवार के दिन किस उपाय को करने से मिलता है क्या लाभ

हिंदू मान्यता के मुताबिक, संजीवनी एक ऐसी बूटी है जिसमें किसी भी परेशानी को खत्म करने की शक्ति है. यह बूटी मृत व्यक्ति के शरीर में जान डाल सकती है. प्राचीन ग्रंथों के मुताबिक संजीवनी बूटी अंधेरे में चमकती है. वैज्ञानिक भाषा में इसका उल्लेख सेलाजिनेला ब्रायोप्टेरिस के रूप में किया गया है. वाल्मिकि रामायण की बात करें तो इसमें लिखा है कि संजीवनी बूटी के चार प्रकार हैं- Also Read - पीएम मोदी और राजपक्षे के बीच हुई वार्ता, भारत ने कहा- अल्पसंख्यक तमिलों की हो सत्ता में भागदारी

1. मृत संजीवनी
2. विशल्यकरणी
3. सुवर्णकर्णी
4. संधानि

बता दें कि हनुमान जी जब लक्ष्मण जी के लिए यह पर्वत उठाकर ला रहे थे तो इस पर्वत का एक हिस्सा रीतिगाला में गिरा. वहीं, श्रीलंका में हाकागाला गार्डन में पहाड़ का दूसरा हिस्सा गिरा था.