नई दिल्ली: पूरा उत्तर भारत इस समय गर्मी की मार झेल रहा है. जहां दिल्ली में गर्मी ने 18 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है वहीं, राजस्थान के चुरु में तापमान 50 डिग्री तक पहुंच चुका है. गर्मियों में तापमान बढ़ने के कारण लू और हीटस्ट्रोक का खतरा भी काफी बढ़ गया है. लू लगना वो स्थिति है, जो शरीर में गर्मी और बढ़ते तापमान की वजह से उत्पन्न होती है. इस दौरान हमारे शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है. बाहरी तापमान और गर्म हवा की वजह से शरीर ठंडा नहीं हो पाता और शरीर का तापमान 106 डिग्री फेरनहाइट या इससे भी ज्यादा हो जाता है. लू लगने पर अगर तुरंत उपचार न मिले, तो मृत्यु या स्थायी विकलांगता भी हो सकती है. Also Read - उत्तर भारत के कई इलाकों में आज लू से मिल सकती है राहत, जानिए अपने यहां के मौसम का हाल

लू लगने के लक्षण
इसके लक्षणों की बात करें तो ऐसे में शरीर का तापमान काफी बढ़ जाता है. शरीर में पानी की कमी होना, आंखों में जलन और खून गर्म होना है. गर्मी और गर्म हवाएं शरीर में अक्सर ऐसा असर डालती हैं, जिस वजह से जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो जाती है. लू लगना भी इन्हीं स्थितियों में से एक है. धूप, गर्मी और गर्म हवा से शरीर को बचाकर ही हम इस स्थिति से बच सकते हैं. Also Read - Heatwave In India: क्या है नौतपा? इसके आते ही क्यों पड़ने लगती है भीषण गर्मी, जानें पृथ्वी से सूर्य की दूरी और गर्मी का पूरा गणित

कैसे करें बचाव
लू लगने से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं. आप लू से बचने के घरेलू उपाय भी कर सकते हैं, जैसे छाछ, चावल का पानी, नींबू या आम का रस, दाल का सूप का सेवन. इसके अलावा आप हल्के, ढीले और पूरी आस्तिन के कपड़े पहने, सिर को हमेशा टोपी या कपड़े से ढककर रखें, गर्म कमरों में बैठने से बचें और हवादार, छायादार या एयर कंडिशन कमरे में ही रहें. शरीर के बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने के लिए ठंडे पानी से स्नान करें. इस दौरान शराब और कार्बोनेटेड पेय और सूरज की किरणों से बचें. Also Read - water crisis: छतरपुर के इस गांव में एक बाल्टी पानी लेने के लिए पहाड़ियो में मीलों दूरी तय कर रहे लोग

इन लोगों को ज्यादा होता है हीटस्ट्रोक का खतरा

– मोटे लोगों को
– शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को
– दिल के मरीजों को
– वे लोग जो ऐसी दवाएं ले रहे हों जो पसीने के सिस्टम, दिमाग के रसायनों, दिल तथा रक्त नलिकाओं आदि पर असर डालती हैं.
– छोटे बच्चों को