होली का त्‍योहार रंगों के बिना अधूरा है. सूखी हो या गीली, बिना रंगों के होली होती ही नहीं. पर इन रंगों से होने वाले साइ‍डइफेक्‍ट्स भी किसी से छुपे नहीं है.

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कई लोगों को त्‍वचा में जलन, चकत्‍ते, लाल धब्‍बे, खुजली, रैशेज हो जाते हैं. क्‍या इसकी वजह ये रंग हैं? तो रंगों को खरीदते समय किस तरह की सावधानियां बरतनी चाहिए. और अगर इसके बावजूद भी एलर्जी हो जाए तो क्‍या करें?

इन सब सवालों के जवाब जानें अपोलो हॉस्पिटल में कॉसमेटिक एंड ऐस्‍थेटिक सर्जन डॉक्‍टर अनूप धीर से.

सिंथेटिक रंगों का असर
पहले होली खेलने के लिए रंग हल्दी और टेसू के फूलों से तैयार किए जाते थे. ये रंग त्‍वचा के लिए हानिकारक नहीं होते थे. लेकिन अब सिंथेटिक रंगों का प्रयोग किया जाता है. इसकी एक वजह ये है कि ये सस्ते होते हैं. बाजार में मिलने वाले अधिकतर गुलाल और अन्य रंग रसायनों से बनाए जाते हैं, जो त्वचा के लिए नुकसानदायक होते हैं. इनकी वजह से त्वचा में जलन, एलर्जी, चकत्ते और रंग में बदलाव हो सकता है. कई बार गंभीर जलन की वजह से त्वचा संक्रमित भी हो सकती है. रसायनों की वजह से आंखों में भी गंभीर परेशानी और जलन हो सकती है और इससे बाल भी प्रभावित हो सकते हैं.

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कैसा गुलाल खरीदें
डॉक्‍टर अनूप कहते हैं कि सिंथेटिक रंगों की बजाय गुलाल बेहतर हैं. अगर ये हर्बल हों तो और ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा. गुलाल खरीदते हुए यह सुनिश्चित करें कि इसे प्राकृतिक उत्पादों का इस्तेमाल कर बनाया गया हो, त्वचा के लिहाज से अनुकूल हो और जानी-मानी कंपनी ने बनाया हो. लाल और गुलाबी बेहतर हो सकते हैं क्योंकि पर्पल, हरे और पीले रंगों में अधिक नुकसानदायक रसायन होते हैं. ये थोड़े महंगे हो सकते हैं लेकिन इन पर पैसा खर्च करना उचित है.

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होली के दिन क्‍या करें
दिन की शुरूआत होने के साथ ही अच्छी स्क्रीन क्रीम या तेल की भरपूर मात्रा चेहरे पर लगा लें और बाल में भी अच्छी तरह तेल लगाएं. हाथ और पैर के नाखूनों को बचाने के लिए नेल पॉलिश लगाएं. इसके साथ ही ऐसे कपड़े पहनें जिनसे आपके शरीर का अधिकतम हिस्सा ढंक जाए. किसी स्कार्फ या टोपी से अपने बाल भी कवर कर सकते हैं.

अगर परेशानी हो
अगर परेशानी होती है तो गर्म पानी और नरम साबुन का इस्तेमाल कर उस हिस्से से रंग तत्काल साफ करें और अपने हाथ से धीरे-धीरे रगड़ें. किसी भी सख्त चीज़ का इस्तेमाल कर त्वचा को न रगड़ें. बचे रंग को साफ करने के लिए किसी नरम कॉटन पर क्रीम क्लिंजर या बेबी तेल का उपयोग करें. अगर आपको नट्स से कोई एलर्जी नहीं है तो आप बादाम तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. त्वचा पर केरोसिन, पेट्रोल का इस्तेमाल न करें क्योंकि इससे त्वचा में रुखापन आ सकता है जिससे परेशानी बढ़ सकती है. अगर सभी रंग एक बार में नहीं जाते तो तुरंत रगड़ने की कोशिश न करें, उसे जस का तस रहने दें, बार-बार धुलने के साथ रंग धीरे-धीरे चला जाता है. बाल को गर्म पानी और नरम शैंपू से धोएं. रंग निकालने के लिए आंखों पर साफ ठंडे पानी के छींटे डालें.

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एक बार साफ किए जाने पर कोल्ड क्रीम या संवेदनशील त्वचा के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मॉस्‍चराइजर लगाएं. सोयाबीन आटे के पेस्ट या दूध के साथ बेसन जैसी घरेलू उपयोग की चीज़ों का इस्तेमाल कर सकते हैं. सी—सॉल्ट, ग्रिसलीन और अरोमा तेल की कुछ बूंदों के मिश्रण में एंटी—बैक्टेरियल और एंटी—फंगल खूबी होती है और यह रासायनिक रंगों के बुरे प्रभावों को खत्म कर सकता है.

हल्के चकत्ते होने पर आरामदायक कैलामाइन लोशन लगाएं. त्वचा के गंभीर रूप से प्रभावित होने पर सूर्य की रोशनी का सामना करने से बचें क्योंकि इससे परेशानी बढ़ेगी. अगर चकत्ते ठीक नहीं हो रहे हों, लाल और उभरा हुआ दिख रहा हो या फिर दर्द महसूस हो रहा हो या आंखों में गंभीर परेशानी हो तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें.

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