हम भले ही 21वीं सदी में जी रहे हैं, लेकिन Sex जैसे किसी शब्द को सुनते ही आज भी हम खुद को असहज महसूस करते हैं. ऐसे में इस पर बात करना हमारे लिए और भी मुश्किल हो जाता है, जब बच्चे इसे लेकर हमसे कोई सवाल पूछ लें. Also Read - Romance Karne Ke Fayde: रोजाना रोमांस करने से शरीर को मिलते हैं ये कमाल के फायदे, यहां जानें इनके बारे में

बच्चों के लिए टीवी पर ‘कंडोम’ के विज्ञापन में अंकल-आंटी को कुछ अजीब सी स्थिति में देखना उनमें इस बात की उत्सुकता पैदा कर देता है कि आखिर दोनों कर क्या रहे हैं? और अगर यह सवाल उन्होंने हमसे पूछ लिया तो हम चाहते हैं कि किसी तरह से बस वहां से गायब हो जाएं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर सेक्स को लेकर अभिभावक बच्चों के साथ बातचीत कैसे और कब शुरू करें? Also Read - किस्सा- मर्दों जैसी आवाज़ निकालने में Karan Johar को लगे 3 साल, उस दिन एक शख्स चुपचाप पास आया और...

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात हमारा यह समझना है क्या हमारा बच्चा इस बारे में जानने व समझने के लिए सक्षम है? इसके लिए बच्चों की कोई निश्चित उम्र तय नहीं की जा सकती, लेकिन जब बच्चों में इस विषय को लेकर उत्सुकता दिखने लगे या बार-बार वे आपसे इसी बारे में सवाल पूछने लगे, तब समझ जाएं कि अब आप अपने बच्चे से इस बारे में संबंधित जानकारी साझा कर सकते हैं. शुरुआत आप शारीरिक अंगों को उनके सही नामों से बुलाकर कर सकते हैं, अब आप कोर्ड वर्ड का इस्तेमाल करना बंद कर दें. Also Read - Physical Relation: पुरुष ही नहीं महिलाओं के लिए भी काफी खतरनाक है शारीरिक संबंध से दूरी, हो सकती हैं गंभीर समस्याएं

वे जैसे-जैसे बड़े होते जाते हैं, उनसे इस बारे में चर्चा करें कि बच्चे कैसे पैदा होते हैं या उनके शब्दों में बच्चे कहां से आते हैं. इसके साथ ही उन्हें यह भी बताएं कि कोई समस्या होने पर माता-पिता व चिकित्सक ही उनके निजी अंगों को स्पर्श कर सकते हैं और किसी को ऐसा करने की इजाजत नहीं है. बच्चों को आजकल इस बारे में जागरूक करना बेहद आवश्यक है.

सेक्स या यौन संबंध का मासूमियत से कोई लेना-देना नहीं है. बच्चे मासूम हैं इसलिए उनसे इस बारे में बात करना उचित नहीं, यह सोचना छोड़ दें. एक जागरूक बच्चे का तात्पर्य ‘शैतान’ बच्चे से नहीं है.

उनसे बात कैसे करें?

हम खुशकिस्मत हैं कि आज हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहां इस बारे में चर्चा शुरू करने के लिए कई साधन उपलब्ध हैं. रॉबी एच हैरिस की किताबों से इसकी शुरुआत की जा सकती है.

सेक्स के बारे में बात करना एक निरंतर प्रक्रिया है. इसके बाद गर्भधारण, प्यार, आकर्षण, शारीरिक आकर्षण, सेक्स जैसे मुद्दों पर धीरे-धीरे चर्चा करें. कई बार ऐसा होता है कि किशोरावस्था में लड़के-लड़कियों को उनके वर्जिन होने के चलते कई उपहासों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में आपका उनसे खुलकर बात करना बेहद महत्वपूर्ण है.

माता-पिता होने के नाते यह समझना आवश्यक है कि बच्चों में उत्सुकता या यौन आग्रह का होना एक सामान्य सी बात है. इसका प्रभाव उनकी नैतिकता और बड़े होने पर नहीं पड़ेगा. दोस्तों या पॉर्न साइट से इस बारे में गलत जानकारी पाने से बेहतर है कि माता-पिता उन्हें सही और सुरक्षित ज्ञान उपलब्ध कराए.
(एजेंसी से इनपुट)

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