आजादी के जश्न में हर कोई शामिल होना चाहता है और हो भी क्यों न ये दिन ही ऐसा है, ये दिन आपको भारतीय होने पर गर्व करवाता है और साथ ही ये बताता है की देश का इतिहास कितना महान और गौरवशाली रहा है. हर साल 15 अगस्त पर आपने आसमान में पतंगों का मेला लगते हुए देखा होगा लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर लोग इस दिन पतंग क्यों उड़ाते हैं. Also Read - सोनिया का मोदी सरकार पर हमला, कहा- सरकार संवैधानिक मूल्यों और प्रजातांत्रिक व्यवस्था के विपरीत खड़ी है

आप ने अपने गली में देखा होगा बच्चे और बड़े 15 अगस्त को पतंग लेकर छत पर चढ़कर पतंगबाजी करते हैं. अगर आपको लगता है की ये कोई शौक या मस्ती है तो ऐसा नहीं है, ये भी इतिहास का एक अहम हिस्सा है. दरअसल 1927 में देश के स्वतंत्रा सेनानियों ने साइमन कमिशन के विरोध में आसमान में पतंगें उड़ाई थी और आज भी लोग इस परंपरा को जारी रखें हुए हैं. Also Read - स्वतंत्रता दिवस पर रूस, भूटान सहित कई देशों ने दी शुभकामनाएं, पीएम मोदी और विदेश मंत्री ने किया शुक्रिया अदा

1927 को पहली बार पतंगों द्वारा विरोध किया गया था और हर पतंग पर लिखा था, ‘साइमन गो बैक’. उस वक्त ये पतंग ब्रिटिश राज का विरोध करने के लिए उड़ाई गई थी, तब से लेकर आजतक लोग इस प्रचलन का साथ देते आ रहे हैं. Also Read - स्‍वतंत्रता दिवस पर डेविड वार्नर ने फेहराया तिरंगा, भारत को बताया दूसरा घर

Kites with pictures of Rahul Gandhi and Narendra Modi. Photo Courtesy: IANS

Kites with pictures of Rahul Gandhi and Narendra Modi. Photo Courtesy: IANS

पतंग उड़ाने का दौर पिछले कुछ सालों में बेहद बदल गया है, लोग अब डिज़ाइनर पतंग उड़ाते हैं.आमतौर पर बॉलीवुड और राजनेताओं की तस्वीरों से सजी हुई पतंग मार्केट में देखने को मिल जाती है. पीएम मोदी के तस्वीर वाली पतंग भी बाजार में देखी जाती है. भारत के कई सारे हिस्सों में पतंगबाजी का अलग से खेल रखा जाता है जिसमें कई सारे लोग हिस्सा लेते हैं. पतंग उड़ाने में लोग समाज में छोटे-बड़े का भेदभाव भूल जाते हैं, पतंग का बाजार दिल्ली में भी खुब सजता है औऱ लोग जमकर इसका लुफ्त उठाते हैं.

पतंग को उड़ाने के लिए एक खास डोर का इस्तेमाल होता है, ये डोर सफेद रंग की होती है जिस लोग सादी कहते हैं और दूसरी पतंग काटने वाली होती है जिसे मांझा कहते हैं. आपकी पतंग का मांझा जितना पक्का होगा आप की पतंग को काटना उतना ही मुश्किल होगा.