नई दिल्ली: 8 मार्च का दिन पूरी दुनिया में अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है. ये दिन महिलाओं के उन सभी अधिकारों के बारे में बात करता है जिन्हें महिलाओं ने अपने लिए हासिल किए हैं. तो आइए जानते हैं कि आखिर कैसे इस बात का निर्णय लिया गया था कि 8 मार्च को ही महिला दिवस मनाया जाएगा. और इसे मनाने के पीछे ऐसे कौन से कारण थे. 8 मार्च को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस बनाने की शुरुआत 1908 में हुई थी. जब न्यूयॉर्क शहर में एक महिला मजदूर आंदोलन किया गया था. इसमें 15 हजार महिलाओं ने कुछ मुद्दों जैसे नौकरी में काम के कम घंटे, बेहतर वेतन के लिए प्रदर्शन किया था. Also Read - VIDEO: इस पाकिस्तानी गाने में आखिर ऐसा क्या है खास, जो इसे शेयर करने से भारतीय भी खुद को नहीं रोक पाए

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस को 1975 में मिली थी मान्यता

इस आंदोलन की चिंगारी ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया. इसका परिणाम यह निकला कि 1910 में कोपेनहेगन में हुए एक कामकाजी महिलाओं के अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन में इस दिन को अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाने का सुझाव दिया गया. अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस को 1975 में मान्यता दी गई थी, जब संयुक्त राष्ट्र ने  8 मार्च को इसे मनाने की शरुआत की थी. Also Read - सरकार का ऐलान, वर्ष 2022 तक देश में बनेंगे 75 लाख महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स 

कई देशों ने इस दिन को अवकाश घोषित किया है

आपको बता दें कि कई देशों ने इस दिन को अवकाश घोषित किया है. इसे अवकाश घोषित करने वाले देशों में अफगानिस्तान, अंगोला, बेलारूस, कजाकिस्तान आदि देश शामिल हैं. वहीं कुछ देशों में इस दिन केवल महिलाओं को छुट्टी दी जाती है जिसमें चीन, नेपाल, मकदूनिया और मेडागास्कार जैसे देश शामिल हैं. Also Read - महिला राजमिस्त्री, सौ वर्षीय एथलीट व मशरूम महिला समेत 15 महिलाएं नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित