International Womens Day 2022 On 8 March 5 Civic Rights Of Women In India Facts About Womens Right
International Women's Day 2022: भारत में 5 नागरिक अधिकार जो सभी महिलाओं को जानना चाहिए
International Women's Day 2022: भारत में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई नागरिक अधिकार हैं. हर महिला को इन अधिकारों के बारे में अच्छी तरह से पता होना चाहिए. हम यहां आपको उन 5 अधिकारों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जिनके बारे में आपको निश्चित तौर पर पता होना चाहिये.
International Women’s Day 2022: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है. महिलाओं की सांस्कृतिक, राजनीतिक और सामाजिक आर्थिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में यह दिन मनाया जाता है. इसका उद्देश्य लैंगिक समानता का संदेश फैलाना और एक बेहतर समाज को बढ़ावा देना है, जहां कोई लैंगिक पूर्वाग्रह न हो. इस वर्ष, संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन की थीम (International Women’s Day 2022 Theme) को ‘एक स्थायी कल के लिए आज लैंगिक समानता’ के रूप में घोषित किया. 21वीं सदी में जहां हम महिलाओं की समानता की बात कर रहे हैं, वहीं बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं, जो अपने अपने अधिकारों के बारे में नहीं जानती हैं और घर से लेकर ऑफिस तक मानसिक, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक हिंसा का शिकार हो जाती हैं. यहां हम कुछ ऐसे अधिकारों के बारे में बता रहे हैं, जिनके बारे में हर महिला को पता होना चाहिए.
1. समान वेतन का अधिकार (Equal Remuneration Act, 1976)
भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में वेतन की असामनता एक समस्या है. लेकिन, भारत में, हमारे पास एक कानून है जो पुरुषों और महिलाओं के लिए समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित करता है. समान पराश्रमिक अधिनियम 1976 के तहत महिलाओं को भी समान काम के लिये एक समान वेतन का अधिकार प्राप्त है.
2. कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment Of Women At Workplace Act, 2013)
इस कानून के तहत कार्यस्थल पर पांच तरह के व्यवहार को यौन उत्पीड़न माना जाता है. इनमें शारीरिक संपर्क, सेक्शुअल फेवर की मांग करना, सेक्शुअल रीमार्क देना, अश्लील फोटो या वीडियो दिखाना और यौन प्रकृति का कोई भी अवांछित शारीरिक, मौखिक या गैर-मौखिक आचरण शामिल है. ऑफिस में कोई व्यक्ति यदि महिला को गलत तरीके से छूता है या भद्दे कमेंट करता है या उससे सेक्शुअल फेवर मांगता है तो यह अधिनियम 2013 के तहत गलत माना जाएगा और इसके आधार पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है.
3. तलाख से जुडा ये कानून (Indian Divorce Amendment Act, 2001)
इस कानून के बारे में सभी महिलाओं को जरूर पता होना चाहिए. खासतौर से यदि आप शादीशुदा हैं, तो आपको इस कानून की जानकारी होनी ही चाहिए. इस कानून के तहत वैवाहिक बलात्कार और कम्यूनिकेबल एसटीडी (विवाह से पहले दो साल या उससे अधिक की अवधि के लिए) तलाक का आधार बन सकता है. मर्जी के बगैर शादी के बाद शारीरिक संबंधत बनाना तलाक की वजह बन सकता है.
4. गर्भपात का अधिकार (The Medical Termination Of Pregnancy Act, 1971)
अगर बच्चा गर्भ में आने के कारण किसी महिला की शारीरिक और मानसिक सेहत बिगड रही है तो कानूनी तौर पर वह पहले तिमाही में अबॉर्शन यानी गर्भपात का अधिकार रखती है.
5. घरेलु हिंसा (Right against domestic violence)
2005 में घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम के आधार पर हर महिला को घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है. घरेलू हिंसा में न केवल शारीरिक शोषण बल्कि मानसिक, यौन और आर्थिक शोषण भी शामिल है.
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