International Yoga Day 2021: पूरी दुनिया में कोरोना वायरस (Corona Virus)महामारी रुकने का नाम नहीं ले रही है. वहीं, अगर भारत की बात की जाए तो कोरोना यहां थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. ऐसे में खुद को कोरोना से बचाने के लिए जरूरी है कि फेफड़ों को मजबूत किया जाए, क्योंकि कोरोना सीधा फेफड़ों पर ही अटैक करता है.Also Read - Punjab Schools Reopening: पंजाब में इस तारीख से खुलेंगे स्‍कूल, सभी होंगी कक्षाएं शुरू

21 जून 2021 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day 2021) है. इस मौके पर आप योग की कुछ टिप्स अपनाकर अपने फेफड़ों को मजबूत रख सकते हैं. आइए जानते हैं कुछ ऐसे योगासनों के बारे में जो आपके फेफड़ों को मजबूत बनाते हैं- Also Read - COVID19 Cases Update: देश में लगतार चौथे दिन कोरोना के सक्रिय मरीज बढ़े, आज 41,649 नए केस दर्ज हुए

भस्त्रिका प्राणायाम- पद्मासन या फिर सुखासन में बैठ जाएं. कमर, गर्दन, पीठ एवं रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए शरीर को बिल्कुल स्थिर रखें. इसके बाद बिना शरीर को हिलाए दोनों नासिका छिद्र से आवाज करते हुए श्वास भरें. फिर आवाज करते हुए ही श्वास को बाहर छोड़ें. अब तेज गति से आवाज लेते हुए सांस भरें और बाहर निकालें. यही क्रिया भस्त्रिका प्राणायाम कहलाती है. हमारे दोनों हाथ घुटने पर ज्ञान मुद्रा में रहेंगे और आंखें बंद रहेंगी. ध्यान रहे, श्वास लेते और छोड़ते वक्त हमारी लय ना टूटे. इस प्राणायाम के अभ्यास से मोटापा दूर होता है. शरीर को प्राणवायु अधिक मात्र में मिलती है और कार्बन-डाई-ऑक्साइड शरीर से बाहर निकलती है. इस प्राणायाम से रक्त की सफाई होती है. शरीर के सभी अंगों तक रक्त का संचार भली-भांति होता है. जठराग्नि तेज हो जाती है. दमा, टीवी और सांसों के रोग दूर हो जाते हैं. फेफड़े को बल मिलता है, स्नायुमंडल सबल होता है. वात, पित्त और कफ के दोष दूर होते है. Also Read - Coronavirus Cases In Kerala: केरल से होगी थर्ड वेब की शुरुआत? आज फिर 20 हजार से अधिक मामले आए सामने

वज्रोली मुद्रा- पदमासन की मुद्रा में बैठें. अपना हाथ घुटने पर रखें, आंखें बंद करें, रिलैक्स करें और नाक से सांस लें. सांस अंदर लें और कुछ देकर उसे रोककर रखें. इस दौरान अपनी पेल्विक मांसपेशियों पर ध्यान केंद्रित करें. कुछ देर बाद सांस छोड़ें और रिलैक्स करें. इसे 10-20 बार दोहराएं. समय से पहले वीर्य स्त्राव की समस्या में ये आसान बेहद कारगर है.

वायु भक्षण- वायु भक्षण का अर्थ होता है वायु को खाना. हवा को जानबूझकर कंठ से अन्न नली में निगलना. यह वायु तत्काल डकार के रूप में वापस आएगी. वायु निगलते वक्त कंठ पर जोर पड़ता है तथा अन्न नलिका से होकर वायु पेट तक जाकर पुन: लौट आती है. वायु भक्षण क्रिया अन्न नलिका को शुद्ध व मजबूत करती है. इससे फेफड़े भी शुद्ध और मजबूत बनते हैं.

पूर्ण भुजा शक्ति विकासक क्रिया- सबसे पहले सावधान मुद्रा में खड़े हो जाएं. अब दोनों पैरों के पंजों को आपस में मिला लें. फिर भुजाओं को सीधा, कंधों को पीछे खींचकर और सीने को तानकर रखें. इसके बाद दाएं हाथ का अंगूठा भीतर और अंगुलियां बाहर रखते हुए मुट्ठी बांध लें. फिर बाएं हाथ के तलवे को जंघा से सटाकर रखें. श्वास भरते हुए दाईं भुजा को कंधों के सामने लाएं. उसके बाद श्वास भरते हुए भुजा को सिर के ऊपर लाएं. अब श्वास छोड़ें और दाईं हथेली को कंधों के पीछे से नीचे लेकर आएं. इस तरह एक चक्र पूरा होगा. अब दाएं हाथ से लगातार 10 बार इसी तरह गोलाकार चलाएं. उसके बाद बाएं हाथ से भी मुट्ठी बनाकर 10 बार गोलाकार चलाएं. इस अंग संचालन योग को करने से जहां एक ओर प्राणशक्ति का विकास होता है वहीं खुलकर गहरी सांस लेने और छोड़ने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है. इसके चलते प्राणशक्ति का स्तर बढ़ जाता है और व्यक्ति दिनभर चुस्त-दुरुस्त बना रहता है.