नई दिल्‍ली: सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्‍व है. सावन महादेव को काफी प्‍यारा है, इसीलिए इस महीने के आरंभ से ही लाखों की संख्‍या में लोग कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं. फिर शुद्ध जल से अपने ईष्‍ट देव का जलाभिषेक कर यात्रा पूरी करते हैं.

क्‍या है कांवड़ यात्रा
पूरे देश से लोग इस यात्रा पर निकलते हैं. उत्‍तरी भारत में इसका चलन ज्‍यादा है. भोलेनाथ के भक्‍त कांवड़ में गंगाजल लेकर यात्रा करते हैं. वे भगवान शिव के किसी देवस्‍थान पहुंचकर इस जल को उन पर अर्पित करते हैं. पर इस दौरान वे कांवड़ को जमीन पर नहीं रखते. जो लोग यात्रा करते हैं उनके कांवड़िया कहा जाता है. ज्‍यादातर कांवड़िए केसरी रंग के वस्‍त्र धारण करते हैं. ये लोग मुख्‍य रूप से गौमुख, इलाहाबाद, हरिद्वार या गंगोत्री जैसे तीर्थस्थलों से गंगाजल भरते हैं.

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क्‍या हैं नियम
इस यात्रा के नियम काफी सख्‍त होते हैं. ऐसा कहा जाता है कि अगर कांवड़िए ने नियमों का पालन नहीं किया तो भगवान रुष्‍ट हो जाते हैं और उसे यात्रा का पूरा फल नहीं मिलता. जानें इन नियमों के बारे में-
– यात्रा में पहला नियम होता है नशे की मनाही. शराब आदि का सेवन नहीं कर सकते.
– नशीले पदार्थों के अलावा मांस का सेवन भी वर्जित माना गया है.

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– कांवड़ को जमीन पर रखने की मनाही होती है. अगर कहीं रुकना है तो पेड़ आदि ऊंचे स्‍थानों पर इसे रख सकते हैं.
– चमड़े से बने सामानों या कपड़ों को पहनना मना है. सात्विक भोजन करने का नियम है.
– यात्रा में भोलेनाथ का नाम जपने की बात कही जाती है. ‘हर हर महादेव’ जैसे नारे लगने चाहिए.
– यात्रा को पैदल करने का विधान है. अगर कोई मन्‍नत मांगी है और उसे पूरी होने पर यात्रा कर रहे हैं तो मन्‍नत के अनुसार यात्रा होनी चाहिए.

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