Kumbh mela 2019 में इस बार भी नागा साधु ही सबका आकर्षण बनेंगे. हर साल इन्‍हीं की सबसे ज्‍यादा चर्चा होती है. Also Read - Maha Kumbh 2021: हरिद्वार महाकुंभ में होने वाले शाही स्नान की तारीखों का ऐलान, यहां देखें पूरी लिस्ट

Also Read - प्रयागराज में शुरू हुआ पावन माघ मेला, यहां जानें किस-किस दिन होगा विशेष स्नान

Kumbh Mela 2019: इन 6 तिथियों पर करोड़ों श्रद्धालु करेंगे स्‍नान-दान, जानें क्‍यों माना जाता है शुभ… Also Read - Kumbh 2019: महाशिवरात्रि पर आखिरी गंगा स्नान के लिए पूरी तरह तैयार है कुंभ नगरी

हो भी क्‍यों ना, आखिर इनका जीवन सबसे अलग जो होता है. इनका जीवन कई कठिनाईयों से भरा हुआ होता है. इन लोगों को दुनिया में क्‍या हो रहा है, इस बारे में इन्‍हें कोई मतलब नहीं होता.

इनके बारे में हर बात निराली होती है. जटाओं से लेकर शरीर पर भस्‍म तक, इनके जैसा कोई और नहीं दिखता. ये इतना कठिन जीवन जीते हैं जिसके बारे में आम लोग सोचते तक नहीं.

kumbh mela

अगर कोई आम आदमी नागा साधु बनने के लिए जाता है, तो अखाड़ा उसके परिवार के बारे में पूछताछ करता है. इसके बाद उसे कठिन दौर से गुजरना होता है. ये परीक्षा केवल नागा साधु बनने तक की नहीं होती. एक बार नागा साधु बनने के बाद भी काफी मुश्किल भरा जीवन व्‍यतीत करना होता है. इसके कई नियम होते हैं.

Kumbh Mela 2019: कुंभ में कल्‍पवास का है विशेष महत्‍व, जानें क्‍या कहता है पद्म पुराण…

नागा साधु को भस्म और रूद्राक्ष धारण करना आवश्‍यक होता है. यही वजह है कि अखाड़े में जो नागा साधु दिखते हैं, वे इसी रूप में दिखते हैं. रोज सुबह स्नान के बाद नागा साधु सबसे पहले शरीर पर भस्म रमाते हैं.

ये वस्‍त्र नहीं धारण कर सकते. अगर बहुत जरूरी हो तो तन पर केवल एक गेरुआ रंग का वस्‍त्र धारण करने की अनुमति होती है. साधु दिन में एक समय भोजन करते हैं. ये भोजन भिक्षा मांगकर एकत्रित किया हुआ होता है.

Kumbh 2019: कुंभ में ये अखाड़े लगाते हैं आस्‍था की डुबकी, जानें इनका पूरा इतिहास

ये हमारी-आपकी तरह पलंग पर नहीं सोते. केवल जमीन पर सोने का नियम होता है. इस दौरान जमीन पर कुछ बिछाते भी नहीं. ये किसी से कोई मतलब नहीं रखते. ना ही किसी की निंदा, ना ही किसी की प्रशंसा.

धर्म की और खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.