Kya Hota Hai Pulse Oximeter:  कोरोना वायरस एक बार फिर पूरी दुनिया में काफी तेजी के साथ फैल रहा है. दिल्ली के साथ ही भारत के कई राज्यों में कोरोना के काफी अधिक केस सामने आ रहे हैं. इतने ज्यादा केसेस आने से लोगों को अस्पतालों में ना तो बेड मिल रहे हैं और ना ऑक्सीजन. ऐसे में डॉक्टर लोगों से घर पर ही आइसोलेट होने की सलाह दे रहे हैं. जिन लोगों में ऑक्सीजन का लेवल कम हो रहा है केवल उन्हीं को अस्पताल में एडमिट कराने की सलाह दी जा रही हैं. ऑक्सीजन का लेवल नापने के लिए डॉक्टर ऑक्सी मीटर का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐमें घर पर अगर आप आइसोलेट हैं तो ऑक्सीजन नापने के लिए पल्स ऑक्सी मीटर का होना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं क्या होता है यह पल्स ऑक्सी मीटर और कैसे काम करता है-Also Read - देश में Omicron BA.4 की दस्तक, हैदराबाद में मिला पहला केस, वैज्ञानिकों ने कही ये बात

क्या होता है ऑक्सी मीटर
प्लस ऑक्सी मीटर एक छोटी सी मशीन होती है, जिसे उंगली पर लगाया जाता है और रीडिंग आती है. इसकी मदद से खून में ऑक्सीजन का सैचुरेशन लेवल मापा जा सकता है. दरअसल ब्‍लड में ऑक्सीजन के प्रवाह से शरीर के सभी अंगों के सही तरीके से काम करने का पता लगाया जा सकता है. ऐसे में यह डिवाइस शरीर में होने वाले छोटे से छोटे बदलाव को भी पकड़ लेता है. Also Read - अभी तक नहीं हुए कोरोना के शिकार; इसे किस्मत न मानें, हो सकती हैं ये वजह

कैसे करता है काम Also Read - Delhi Coronavirus Update: दिल्ली में कोरोना में बड़ी भारी गिरावट, एक की मौत

कोरोना के मरीजों को दिन में 3 से 4 बार प्लस ऑक्सी मीटर के जरिए अपना ऑक्सीजन लेवल चेक करना चाहिए. जो लोग होम ऑइसोलेश में हैं उनके यह यह काफी जरूरी होता है. पल्‍स ऑक्‍सीमीटर स्किन पर एक डीम लाइट छोड़ता है और ब्लड सेल्स के मूवमेंट और उनके रंग को डिटेक्ट करता है. ये ब्लड सेल्स के कलर के आधार पर ऑक्सीजन सैचुरेशन को मापता है.

कितना होना चाहिए ऑक्सीजन का लेवल
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, एक स्वस्थ व्यक्ति का ऑक्सीजन लेवल 96 फीसदी होना चाहिए. अगर ऑक्सीजन लेवल 95 फीसदी से कम होता है तो यह खतरा माना जाता है. वहीं, अगर ऑक्सीजन लेवल 90 से कम होता है तो मरीज को तुरंत अस्पताल में लेकर जाना चाहिए.