Maharishi Dayanand Saraswati Jayanti 2020: महर्षि दयानंद सरस्‍वती जयंती 18 फरवरी 2020 को मनाई जाएगी. आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. Also Read - Maharishi Dayanand Saraswati Jayanti 2020: आर्य समाज के संस्‍थापक महर्षि दयानंद सरस्‍वती के बारे में 10 अनसुनी बातें

स्वामी जी को 19वीं सदी का बड़े समाज सुधारकों में शामिल किया जाता है. 12 साल की उम्र में उन्‍होंने संन्यासी बनने के लिए घर त्याग दिया था. तब उन्‍होंने दयानंद नाम ग्रहण किया. जीवन पर्यंत समाज सुधार और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लोहा लेते रहे.

आज हम लाए हैं उनके ऐसे अनमोल विचार, जो जीवन बदल सकते हैं-

 

– अहंकार, मनुष्य के अन्दर वो स्थिति लाता है, जब वह आत्मबल और आत्मज्ञान को खो देता है.

 

– संस्कार ही मानव के आचरण की नींव है. जितने गहरे संस्कार होते हैं, उतना ही अडिग मनुष्य अपने कर्तव्य पर, धर्म पर, सत्य पर और न्याय पर चलता है.

 

– मानव को अपने पल-पल को आत्मचिन्तन में लगाना चाहिए, क्‍योंकि हर क्षण हम परमेश्वर द्वारा दिया गया समय खो रहे हैं.

 

– जिसको परमात्मा और जीवात्मा का यथार्थ ज्ञान, जो आलस्य को छोड़कर सदा उद्योगी, सुख-दुःख आदि का सहन, धर्म का नित्य सेवन करने वाला, जिसको कोई पदार्थ धर्म से छुड़ाकर अधर्म की ओर ना खींच सके, वह पंडित कहलाता है.

 

– क्षमा करना सबके बस की बात नहीं, क्योंकि ये मनुष्य को बहुत बड़ा बना देता है.

 

– ईष्या से मनुष्य को हमेशा दूर रहना चाहिए. क्योकि ये मनुष्य को अन्दर ही अन्दर जलाती है और पथ भ्रष्ट कर देती है.

 

– यश और कीर्ति ऐसी विभूतियां हैं, जो मनुष्य को संसार के मायाजाल से निकलने में सबसे बड़े अवरोधक हैं.

 

– घमंड, मनुष्य की वो स्थिति या दशा है, जिसमें वह अपने मूल कर्तव्य से भटककर विनाश की ओर चला जाता है.

 

– ये शरीर नश्वर है, हमें इस शरीर के जरीए सिर्फ एक मौका मिला है, खुद को साबित करने का कि मनुष्यता और आत्मविवेक क्या है.

 

– क्रोध का भोजन विवेक है, अतः इससे बचके रहना चाहिए. विवेक नष्ट हो जाने पर, सब कुछ नष्ट हो जाता है.

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