नई दिल्‍ली: घरेलू काम को लेकर अलग सोच रखने वाले पुरुषों की अब सोच बदल रही है. पिछले तीन सालों में 27 फीसदी पुरुषों की सोच घरेलू काम को लेकर बदल चुकी है. इनका मनाना है कि घरेलू काम सिर्फ महिलाओं और बेटियों का काम नहीं है, इसमें सभी का सहयोग होना चाहिए.

बता दें कि परिवारों में असमानता की वास्‍तविकता का पता लगाने के लिए एक अभियान चलाया गया है. यह अभियान एरियल के मार्फत शेयर दि लीड शीर्षक के तहत चलाया है. साल 2015 में शुरू किए गए इस अभियान में 79 प्रतिशत पुरुषों का मानना था कि घरेलू काम सिर्फ औरतों का है और बाहरी काम पुरुषों का है लेकिन पिछले तीन सालों में पुरुषों की यह सोच बदलने लगी है. 2016 में सिर्फ 63 प्रतिशत ने घरेलू काम के लिए बेटियों को जिम्‍मेदार ठहराया था. साल 2018 में यह संख्‍या घटकर 52 प्रतिशत हो गई है. पुरुष अब धीरे-धीरे मानने लगे हैं कि घरेलू काम में सभी का सहयोग होना चाहिए.

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वीकेंड को लेकर यह बात आई सामने
वक्‍ता ने कहा कि इस अभियान में सिर्फ असमानता की बारीकी ही नहीं पता चल रही हे बल्कि पुरुषों की सोच इस अभियान के चलते बदल रही है. साल 2018 में हुए एक स्‍वतंत्र सर्वे में यह भी बात सामने आई है कि 72 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वीकेंड सिर्फ खरीददारी और घरेलू काम के लिए है जबकि 68 प्रतिशत पुरुषों का मानना है कि वीकेंड सिर्फ विश्राम के लिए है.

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