नई दिल्ली: वर्कप्‍लेस का तापमान कर्मचारियों की कार्यक्षमता पर असर डालता है. गर्मी ज्‍यादा हो तो प्रोडक्टिविटी कम होती है और कर्मचारियों के अनुपस्थित रहने का ट्रेंड बढ़ता है. एक नई रिपोर्ट के अनुसार वर्कप्‍लेस पर एयर कंडीशनर लगाने से प्रोडक्टिविटी बेहतर होती है, लेकिन कर्मचारियों के अनुपस्थित रहने के ट्रेंड पर इसका कोई असर नहीं होता.

भारतीय विनिर्माण क्षेत्र से जुटाए गए आंकड़ों के एक अध्ययन से खुलासा हुआ है कि ऐसे कार्यस्थल जहां शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है, वहां 27 डिग्री सेल्सियस से ऊपर प्रति डिग्री तापमान बढ़ने पर कर्मचारियों की उत्पादकता में चार फीसदी की गिरावट दर्ज की जाती है.

Joint Pain को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, हो सकती है ये गंभीर बीमारी

इसमें कहा गया कि दस दिन के औसत तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी इस बात की संभावना बढ़ा देती है कि पांच फीसदी तक एक कर्मचारी अनुपस्थित रहेगा. उत्पादकता और श्रम आपूर्ति पर तापमान का प्रभाव: भारतीय विनिर्माण से साक्ष्य पर यह अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट ने किया है. इसमें कार्य से अनुपस्थिति पर उच्च तापमान के प्रभाव पर भी चर्चा की गई.

अगर आप भी किडनी की किसी बीमारी से जूझ रहे हैं तो ये इलाज हो सकता है कारगर

अध्ययन में कहा गया, ‘‘श्रम केंद्रित और स्वचालित विनिर्माण प्रक्रियाओं में अनुपस्थिति बढ़ जाती है.’’ इसमें कहा गया कि कार्यस्थल पर वातानुकूलन यंत्र लगाना या जलवायु नियंत्रण के उपाय अपनाने से घटती उत्पादकता को रोकने में मदद मिलती है लेकिन इससे कार्य से अनुपस्थित होने पर असर नहीं पड़ता.

चीन के एक तिहाई नागरिक नहीं करते ब्रेकफास्ट, सामने आई चौंकाने वाली वजह

इस अध्ययन के सह लेखक और एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के दक्षिण एशिया निदेशक अनंत सुदर्शन ने एक बयान में कहा, ‘‘मानव मनोविज्ञान क्योंकि एक ही रहता है भले ही आप भारत में रहें या अमेरिका में या दुनिया में कहीं भी, गर्म तापमान और कम उत्पादकता के बीच संबंध हर जगह के लिये एक जैसा होगा कि हमें जलवायु परिवर्तन को लेकर कैसे सोचना चाहिए.’’