
Shweta Bajpai
नमस्कार, मैं श्वेता बाजपेई, वर्तमान में India.com हिंदी में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हूं. हिंदी पत्रकारिता में लगभग 10 वर्षों के अनुभव के दौरान मैंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एंटरटेनमेंट ... और पढ़ें
आजकल छोटा हो या बड़ा हर कोई सोशल मीडिया पर एक्टिव रहता है. आए दिन सोशल मीडिया पर कोई न कोई ट्रेंड वायरल होते रहते हैं. ऐसे में इन दिनों सोशल मीडिया पर माउथ टेपिंग नाम का एक ड्रेंट जोरों से वायरल हो रहा है. इस ट्रेंड में लोग मुंह पर टेप लगाकर सो रहे हैं. इस ट्रेंड में लोग सोने से पहले मुंह पर टेप लगाकर रहे हैं और उसके बाद सो रहे हैं. ऐसे में लोग रात भर मुंह से नहीं बल्कि नाक से सांस ले रहे हैं.
कुछ लोगों का मानना है ये सेहत के लिए अच्छा है और इससे खर्राटे कम होते हैं साथ ही साथ नींद की क्वालिटी भी बेहतर होती है, इतना ही नहीं इससे मुंह सूखना भी बंद हो जाता है. हालांकि इस बात की जानकारी कम ही लोगों को है कि क्या ये वाकई सेहत के लिए ठीक है? आइए लेख में जानते हैं.
वैज्ञानिकों की मानें तो माउथ टेपिंग का मुख्य उद्देश्य है नाक से सांस लेना. जब हम नाक से सांस लेते हैं तो हवा फिल्टर होती है, साथ ही साथ नमी मिलती है और फेफड़ों तक पहुंचने से पहले गर्म हो जाती है. हेल्थलाइन और अन्य विशेषज्ञों की मानें तो इससे और भी फायदे हो सकते हैं जैसे-
कुछ स्टडीज की मानें तो माउथ टेपिंग से खर्राटे और नींद में रुकावट की समस्या से रहात मिली है. हालांकि ज्यादातर फायदे एनकडोटल हैं.
नाक से सांस vs मुंह से सांस:
इस ट्रेंड के वायरल होने के बाद लोगों के मन में ये सवाल तेजी से दौड़ रहा है कि आखिर नाक से या मुंस से सांस लेना क्या ज्यादा बेहतर है? ऐसे में डॉक्टर्स की मानें तो नाक से सांस लेना प्राकृतिक और बेहतर हो सकता है, क्योंकि नाक से सांस लेते वक्त हवा में मौजूद धूल और एलर्जी फिल्टर हो जाती है. साथ ही साथ हवा नम और गर्म होकर फेफड़ों तक पहुंचती है. इतना ही नहीं नाक से सांस लेने से अस्थमा व सांस की समस्या वाले लोगों को राहत मिल सकती है.
वहीं मुंह से सांस लेने की बात करें तो जब हम मुंह से सांस लेते हैं तो मुंह सूखने की परेशानी, खर्राटे और इंफेक्शन की परेशानी भी बढ़ जा रही है. हालांकि विशेषज्ञ माउथ टेपिंग को सभी के लिए सुरक्षित नहीं मानते हैं. 2025 की रिसर्च में पाया गया कि इसके वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं, वहीं इससे जुड़े जोखिम ज्यादा हैं जैसे :
ऐसे में क्लीवलैंड क्लिनिक और वेबएमडी जैसे स्रोत चेतावनी देते हैं कि बिना डॉक्टर की सलाह के न ट्राई करें, खासकर अगर आपको स्लीप एप्निया, नाक की ब्लॉकेज या सांस की समस्या है तो.
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