नई दिल्ली: नवरात्रि के नौ दिन मां के 9 रूपों की पूजा होती है. मां के हर रूप का अलग महत्व है और उनका पूजन विधि भी उनके स्वरूप के अनुसार है. नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है. Also Read - #Navratri 2018 9th Day: नवमी को इस विधि से करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, पढ़ें मंत्र, आरती और महत्व

नवरात्र के तीसरे दिन का महत्व
अपने चंद्रघंटा स्वरूप में मां परम शांतिदायक और कल्याणकारी हैं. उनके मस्तक में घण्टे के आकार का अर्धचन्द्र है. इसलिए मां के इस रूप को चंद्रघण्टा कहा जाता है. इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है. इनका वाहन सिंह है. इनके दसों हाथों में अस्त्र-शस्त्र हैं और इनकी मुद्रा युद्ध की मुद्रा है. मां चंद्रघंटा तंभ साधना में मणिपुर चक्र को नियंत्रित करती है और ज्योतिष में इनका संबंध मंगल ग्रह से होता है. इनकी पूजा करने से भय से मुक्ति मिलती है और अपार साहस प्राप्त होता है. Also Read - Navmi Kanya Pujan Shubh Muhurt: नवमी के दिन कन्या पूजन के दो शुभ मुहूर्त, जानिये

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कैसे करें पूजन
मां चंद्रघंटा को लाल फूल चढ़ाएं, लाल सेब और गुड़ चढाएं, घंटा बजाकर पूजा करें, ढोल और नगाड़े बजाकर पूजा और आरती करें, शुत्रुओं की हार होगी. इस दिन गाय के दूध का प्रसाद चढ़ाने का विशेष विधान है. इससे हर तरह के दुखों से मुक्ति मिलती है.

मां चंद्रघंटा के इस मंत्र का करें जाप:
पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते महयं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।

इस मंत्र का जाप भी होता है शुभकारी:
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥