नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri 2018) के आरंभ पर भक्तों के मन में उत्साह होता है. इस दौरान वे मां की पूजा में लीन होते हैं और कई ऐसे नियमों का पालन करते हैं जिन्हें वे पीढ़ियों से देखते-सुनते आए हैं.

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इन्हीं में से एक लहसुन-प्याज का सेवन ना करने की परंपरा. लोग माता की पूजा के 9 दिनों के दौरान इनका सेवन नहीं करते हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी चल रही इस पंरपरा के पीछे की वजह क्या है?

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एक प्रमुख वजह तो ये है कि नवरात्रि में ‘तामसिक’ भोजन से दूर रहने की परंपरा है. माना जाता है कि इस तरह के भोजन से शरीर में नकारात्मक ऊर्जा आती है. पर ऐसा नही है कि केवल हिंदू धर्म में ऐसी मान्यताएं हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि प्राचीन मिस्त्र के पुरोहित प्याज और लहसुन नहीं खाते थे. यही नहीं, चीन में रहने वाले बौद्ध धर्म के अनुयायी भी इन सब्जियों को खाना पसंद नहीं करते. जापान के प्राचीन खाने में कभी भी लहसुन का प्रयोग नहीं किया जाता था.

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हिंदू धर्म, नवरात्रि के दौरान इन नियमों का पालन इसलिए करता है क्योंकि वेदों में कहा गया है कि प्याज-लहसुन के सेवन से शरीर में जुनून, उत्तजेना और अज्ञानता जैसी भावनाओं को बढ़ावा मिलता है. ये भावनाएं किसी व्यक्ति द्वारा भगवद् या लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में बाधा उत्पन्न करती हैं, व्यक्ति की चेतना को प्रभावित करती हैं इसलिए इन्हें नहीं खाना चाहिए. हालांकि नवरात्रि के दौरान लहसुन-प्याज खाने या ना खाने को लेकर कोई बाध्यता नहीं है.

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यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान लोग सात्विक भोजन खाते हैं, जमीन पर सोते हैं और कई नियमों का पालन करते हैं. ये नियम खासतौर पर उन लोगों के लिए बनाए गए हैं जो नवरात्रि के दौरान नौ दिन का व्रत करते हैं. व्रती केवल व्रत वाला शुद्ध भोजन खाते हैं. कुछ लोग हर दिन एक बार भोजन करते हैं पर प्याज-लहसुन के बिना बना हुआ. कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पूरे नवरात्रि भोजन ग्रहण नहीं करते हैं.

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