ऑफिस ऐसी जगह है जहां आप भले ही दिन का एक तिहाई समय बिताते हों, पर यह वह समय होता है, जब दिमाग ज्यादा एक्टिव रहता है और इसी कारण यह दिनभर का सबसे प्रोडक्टिव समय भी माना जाता है. ऐसे में ऑफिस का इंटीरियर ऐसा होना चाहिए जो कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करे. सिक्का ग्रुप के एमडी हरविंदर सिक्का, और महागुन ग्रुप के डायरेक्टर धीरज जैन ने बताया किन उपायों को अपनाकर ऑफिस प्रोडक्टिव बनाया जा सकता है. Also Read - गौरी से अपना ऑफिस डिजाइन करवाने के लिए बेकरार हैं शाहरुख खान, लेकिन बीवी ने दे दिया टका सा जवाब

लाइट का बैलेंस : लाइट कर्मचारियों के मूड पर सबसे अधिक प्रभाव डालती है और इसलिए इसका खास ध्यान रखा जाना चाहिए. डेस्क के पास लाइट 300-400 लक्स की होनी चाहिए और अगर एलईडी लाइट लगी हो तो और भी बेहतर होता है. लाइटिंग के दौरान अधिक फोकस चमक और विजन पर होना जरूरी है, इससे कर्मचारियों को आंखों में जलन भी नहीं होती और बिना आंखों पर जोर डाले वह ज्यादा काम कर पाते हैं. लाइट को इस तरह प्लान करके भी लगाना चाहिए कि वह बाहर से आने वाली गर्मी और रोशनी का भी संतुलन बनाने में सक्षम हों. Also Read - watch photos of President Obama's new home | बराक ओबामा ने लिया आलीशान घर, देखिये तस्वीरें

फ्लोर : ऑफिस का फर्श साफ और सुरक्षित होना चाहिए. फर्श को ज्यादातर कड़क और नरम फर्श में बांटा जाता है. इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए कि फर्श थर्मल प्रतिरोधी और ज्वलनशील हो, साथ ही फर्श ऑफिस में होने वाले शोर को भी सोख लेने में सक्षम हो ताकि काम ज्यादा बेहतर तरीके से हो सके. इसके अलावा इसे साफ करना आसान हो और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए, फर्श में कम कार्बन फुटप्रिंट होना चाहिए.

रंगों का सही मिश्रण : रंग न केवल मूड पर प्रभाव डालते हैं, बल्कि ऑफिस के माहौल, मौसम के असर, प्रोडक्टिविटी और व्यवहार पर भी कारगर होता है. ऑफिस के लिए हमेशा हल्के रंग जैसे नीला, सफेद, हल्का हरा, हल्का पीला आदि इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

आरामदायक फर्नीचर : एर्गोनोमिक फर्नीचर (वर्कप्लेस के लिया बनाया गया खास फर्नीचर) को हमेशा प्राथमिकता देनी चाहिए. काम करने वाली टेबल का साइज पर्याप्त होना चाहिए, कंप्यूटर, स्टेशनरी आदि आने के बाद भी कुछ जगह खाली होनी चाहिए. 4×2 फीट की टेबल प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने के लिए सबसे उचित मानी जाती है.

चलने की जगह : ऑफिस के अंदर चलने और खड़े होने के लिए खुली जगह होना बहुत जरूरी है. कोरिडोर, बालकनी, और बाकी खुली जगह का साइज पर्याप्त होना जरूरी है. कोरिडोर और खुली जगह इस तरह की हो कि वहां से वेंटिलेशन सही होने के साथ ज्यादा भीड़ या इमरजेंसी के समय में कोई दिक्कत न उत्पन्न हो. खुली जगह ऑफिस को सुंदर और मजेदार भी बनती है, जो प्रोडक्टिविटी पर सीधा असर डालती है.