आजकल बच्‍चे बाहर जाकर खेलने की बजाय घर के भीतर ही टीवी और कंप्‍यूटर से चिपके रहते हैं. इसका सीधे तौर पर असर उनकी शारीरिक ग्रोथ पर होता है.

हाल ही में किए गए अध्‍ययन में भी यही बात सामने आई है. इस अध्‍ययन में कहा गया है कि कम्प्यूटर गेम्स के युग में बच्चों के लिए घर से बाहर निकलकर पड़ोसी बच्चों के साथ खेलना बहुत जरूरी है.

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यही नहीं, शोध में ये भी कहा गया है कि बाहर जाकर खेलना-कूदना जितना बच्‍चों के लिए जरूरी है, उतना ही वयस्‍कों के लिए भी आवश्‍यक है.

शोध किया है राइस यूनिवर्सिटी ने. प्रमुख शोधकर्ता लॉरा कबीरी सहित अन्‍य शोधकर्ताओं ने कहा है कि समस्या इस बात को जानने को लेकर है कि आखिर कितनी सक्रियता संगठित जीवनशैली के लिए जरूरी है.

शोधकर्ताओं ने कहा कि परिजनों को अपने बच्चों को प्रतिदिन शारीरिक गतिविधियों के लिए और ज्यादा समय देना चाहिए.

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कबीरी ने कहा, ‘परिजन जानते हैं कि अगर वे अपने बच्चों को तेज सांस लेते हुए और पसीना छोड़ते हुए नहीं देखेंगे तो इसका मतलब वे पर्याप्त परिश्रम नहीं कर रहे हैं’.

उन्होंने कहा, ‘शारीरिक गतिविधियों के लिए और अवसर होने चाहिए. अपने बच्चों को बाहर लाएं और उन्हें दौड़ने, पड़ोसी बच्चों के साथ खेलने दें’. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बच्चों को एक दिन में मुख्य रूप से एक घंटे की एरोबिक गतिविधि करनी चाहिए.

जर्नल ऑफ फंक्शनल मोफरेलॉजी एंड किनेसिओलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने अपने शोध में घर में पढ़ाई करने वाले 10-17 साल के 100 बच्चों को शामिल किया था.
(एजेंसी से इनपुट)

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