नई दिल्ली: बच्चों को अक्सर दादा-दादी का साथ खूब पसंद आता है. बच्चें उन्हे अपने दोस्त की तरह ही समझते हैं. दादा- दादी के लिए बच्चे एक खिलौने की तरह होते हैं बच्चों के साथ उनका मन लगता है. बच्चों के लिए दादा-दादी उनके दोस्त और शिक्षक होते हैं. कई ऐसी बातें और सीख होती हैं जो बच्चों के दादा-दादी से मिलती है. ऐसे में आज के समय में जहां फैमिली छोटी होने लगी है परिवार में आजकल माता-पिता और एक या दो बच्चे होते हैं ऐसे में दादा-दादी का साथ होना बहुत जरूरी है. Also Read - Parenting Tips: कोरोना वायरस से संक्रमित महिलाएं शिशु को ब्रेस्ट फीडिंग कराते समय जरूर करें ये काम

क्यों जरूरी है बच्चों के लिए दादा-दादी का साथ Also Read - Healthy Parenting With Corona Virus: अगर माता और पिता दोनों हैं कोरोना पॉजिटिव तो जानें कैसे रखें अपने बच्चे का ख्याल, ऐसी रखें तैयारी

– दादा-दादी अपने जीवन के अनुभवों को बच्चों के साथ शेयर करते हैं जिससे उन्हें काफी कुछ सीखने को मिलता है. Also Read - Home Remedies: जानें आखिर क्यों नवजात शिशु के पेट में बनती है गैस? अपनाएं ये घरेलू उपाय

– दाद-दादी हर मुश्किल का हल निकाल लेते हैं ऐसे में उनके साथ से बच्चों को भी मुश्किल समय में हल निकालना आ जाता है.

– बच्चे दादा-दादी से कई चीजें जैसे भगवान की पूजा करना, बड़ों का सम्मान करना, रिश्ते निभाना, छोटों से प्यार, अपने रीति-रिवाज और संस्कृति सबकुछ बच्चे अपने दादा-दादी से ही सीखते हैं.

दादा- दादी बच्चों के रोल मॉडल होते हैं. दादाृदादी से बच्चों में सब्र, व्यवहार, सिद्धांत आदि आते हैं.

संयम- आज के बच्चों में संयम देखने को नहीं मिलता क्योंकि उनकी हर ख्वाहिश पर मां-बाप उन्हें तुरंत हर चीज ले देते हैं. ऐसे में दादा-दादी ही बच्चों को संयम रखना सिखाते हैं, जोकि मन की शांति के लिए बहुत जरूरी होता है.

नैतिक शिक्षा- दादा दादी विश्वास, प्रेम और प्रारंभिक शिक्षा के स्तंभ के रूप में कार्य करते हैं. वे बच्चों को अच्छी कहानियां सिखाते हैं और समझाते हैं कि जीवन में कुछ चीजें महत्वपूर्ण क्यों हैं. दादी-नानी की कहानियां बच्चों को ज्ञान देती हैं और ऐसी नैतिक कहानियों का ऐसे बच्चों के जीवन पर अच्छा प्रभाव पड़ता है.

परिवार के बारे में बच्चों को मिलती है जानकारी- बच्चे अपने परिवार के इतिहास के बारे में बहुत कुछ जानते हैं और अपने दादा दादी की भावनात्मक बातें समझा करते हैं, तो इस तरह बच्चों में किसी से भी जुड़ाव रखने की भावना को प्रबलता मिलती है. बच्चे न सिर्फ दादा-दादी के और करीब आ जाते हैं, बल्कि उनमें स्नेह, आदर और सेवा जैसे मानवीय गुण भी विकसित होते हैं.