Pneumonia: ठंड के मौसम में बच्चे काफी जल्दी बीमारियों का शिकार हो जाते हैं. खासतौर पर सर्दी-जुकाम आम बात है. अगर सही तरीके से ध्यान न रखा जाए, तो ये साधारण सा जुकाम बिगड़कर कम निमोनिया बन जाता है, पता ही नहीं चलता. Also Read - Alert: हल्के में ना लें निमोनिया की बीमारी को, 2030 तक लाखों बच्चों के मौत की आशंका...

इस संबंध में कई राज्यों के स्वास्थ्य विभाग भी पहले से एलर्ट जारी कर चुके हैं. इसमें कहा गया है कि ठंड के मददेनजर शून्य से 5 वर्ष तक के बच्चों में निमोनिया के संक्रमण से बचाव के लिए सावधानियों को अपनाना बेहद आवश्यक है. Also Read - फिर बिगड़ी दिलीप कुमार की तबीयत, लीलावती अस्पताल में कराया गया भर्ती

भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी प्रभाकर तिवारी ने एडवाईजरी जारी कर कहा कि निमोनिया जानलेवा हो सकता है. निमोनिया के उपचार में देरी बच्चे के लिये खतरनाक हो सकती है. Also Read - Dilip Kumar treated for pneumonia | दिलीप कुमार ने निमोनिया का इलाज कराया

बच्चों में बुखार, खांसी, श्वांस तेज चलना, पसली चलना अथवा पसली धसना निमोनिया के लक्षण हैं. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बच्चों को निमोनिया से उपचार के लिये तुरंत चिकित्सक अथवा निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र में ले जायें.

तिवारी के अनुसार सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में शिशुओं को निमोनिया से बचाव में बेहद कारगर वैक्सीन पीसीवी भी नि:शुल्क उपलब्ध है. अपने शिशुओं को डेढ़, साढ़े तीन एवं नौ माह में निमोनिया से बचाव हेतु पीसीवी वैक्सीन की पूर्ण डोज नि:शुल्क अवश्य लगवायें.

बच्चों को ठंड से बचाव के लिये अभिभावकों से आग्रह किया है कि बच्चों को दो-तीन परतों में गर्म कपड़े पहनायें. ठंडी हवा से बचाव के लिये शिशु के कान को ढंके, तलुओं को ठंडेपन से बचाव के लिये बच्चों को गर्म मोजे पहनायें.
(एजेंसी से इनपुट)