ज्यादातर लोग ये सोचते हैं कि प्रदूषण की वजह से सांस लेने में दिक्कत होती है. इससे फेफड़े खराब होने का डर रहता है, पर क्या आप इसके और दुष्प्रभावों के बारे में जानते हैं. Also Read - World Environment Day 2020 : पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या करता है भारत और उसका पड़ोसी देश चीन, पढ़ें यहां

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देश के कई बड़े डॉक्टर्स कहत हैं कि प्रदूषण के कारण से सांस लेने में दिक्कते तो होती हैं, आंखों से संबंधित कई समस्याएं भी हो सकती है. इनमें कोर्निया को होनेवाली क्षति भी शामिल है. Also Read - पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर बोले- प्रदूषण से नहीं पड़ता लोगों के जीवन और स्वास्थ्य पर असर

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क्या कहते हैं डॉक्टर्स

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के ऑप्थामोलोजिस्ट डॉ. राजेश सिन्हा कहते हैं, ‘नाक और मुंह की तरह आंखों को ढकना काफी मुश्किल है. इससे फेफड़ों की तरह ही आंखों पर भी वायू प्रदूषण का बुरा असर पड़ता है’.

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सर गंगा राम हॉस्पिटल, दिल्ली के ऑप्थामोलोजिस्ट डॉ. टिंकू बाली राजदान ने बताया, ‘कई सालों तक प्रदूषण के संपर्क में रहने के कारण कोरोना को क्षति पहुंचती है, यह तुरंत नहीं होता है. अगर ड्राई आई की समस्या लंबे समय तक रहती है, तो यह कोरोना को क्षतिग्रस्त कर सकती है, जिससे लंबे समय में दृष्टि प्रभावित होती है’.

डॉ. राजदान ने कहा कि वायु प्रदूषण के संपर्क से ड्राइ आई की समस्या या आंखों के पानी की गुणवत्ता खराब हो जाती है. इससे आंखों में खुजली, परेशानी और लाल होने की समस्याएं होने लगती है.

मैक्स हेल्थकेयर के आंख विभाग के निदेशक और प्रमुख डॉ. संजय धवन का कहना है, ‘आंखों में खुजली, परेशानी और नजर कमजोर होने की समस्या से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है तथा इम्युनिटी कम होने के कारण ड्राई आई और अन्य संक्रमण बढ़े हैं’.

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