Propose Day 2020:आशिक़ों का माह-ए-मोहब्बत अपने उफ़ान पर है. शनिवार से शुरू हुआ ये वैलेंटाइन वीक का आज दूसरा दिन है. इस दिन को प्यार करने वाले ‘प्रपोज डे’ के नाम से जानते हैं. आज प्यार के इज़हार का दिन है. इसका मतलब है मोहब्बत की बुनियाद में आज का ये दिन बहुत ज़रूरी है. आम तौर पर किसी से अपने दिल की बात कहने के लिए  बहुत हिम्मत का एक चट्टान अपने सीने से बांधना पड़ता है मगर कुछ लफ़्ज़ ऐसे होते हैं जो आसानी से आपके एहसास की तर्जुमानी कर देते हैं. आज के इसी ख़ास मौक़े पर हम लाए हैं आपके लिए कुछ बेहतरीन शायरी जो आपके काम आ सकती हैं.

Happy Propose Day 2020: Read here ‘Propose Day’ Special Hindi Shayari- यहां पढ़िए प्रपोज डे पर कुछ चुनिंदा शायरी

ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को
ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं

ख़ुमार बाराबंकवी

हाल-ए-दिल क्यूँ कर करें अपना बयाँ अच्छी तरह
रू-ब-रू उन के नहीं चलती ज़बाँ अच्छी तरह

बहादुर शाह ज़फ़र

इश्क़ के इज़हार में हर-चंद रुस्वाई तो है
पर करूँ क्या अब तबीअत आप पर आई तो है

अकबर इलाहाबादी

एक दिन कह लीजिए जो कुछ है दिल में आप के
एक दिन सुन लीजिए जो कुछ हमारे दिल में है

जोश मलीहाबादी

Happy Propose Day 2020: मोहब्बत के इजहार पर शायरी

मुझ से नफ़रत है अगर उस को तो इज़हार करे
कब मैं कहता हूँ मुझे प्यार ही करता जाए

इफ़्तिख़ार नसीम

तुझ से किस तरह मैं इज़हार-ए-तमन्ना करता
लफ़्ज़ सूझा तो मआ’नी ने बग़ावत कर दी

अहमद नदीम क़ासमी

सब कुछ हम उन से कह गए लेकिन ये इत्तिफ़ाक़
कहने की थी जो बात वही दिल में रह गई

जलील मानिकपूरी

दिल पे कुछ और गुज़रती है मगर क्या कीजे
लफ़्ज़ कुछ और ही इज़हार किए जाते हैं

जलील ’आली’

Happy Propose Day 2020: Read here Valentine Week Special Shayari

ज़बान दिल की हक़ीक़त को क्या बयाँ करती
किसी का हाल किसी से कहा नहीं जाता

अज़ीज़ लखनवी

और इस से पहले कि साबित हो जुर्म-ए-ख़ामोशी
हम अपनी राय का इज़हार करना चाहते हैं

सलीम कौसर

इज़हार-ए-हाल का भी ज़रीया नहीं रहा
दिल इतना जल गया है कि आँखों में नम नहीं

इस्माइल मेरठी

हाल-ए-दिल सुनते नहीं ये कह के ख़ुश कर देते हैं
फिर कभी फ़ुर्सत में सुन लेंगे कहानी आप की

लाला माधव राम जौहर

Propose Day 2020: Love Shayari in Hindi

हाल-ए-दिल यार को महफ़िल में सुनाएँ क्यूँ-कर
मुद्दई कान इधर और उधर रखते हैं

लाला माधव राम जौहर

पुर्सिश-ए-हाल भी इतनी कि मैं कुछ कह न सकूँ
इस तकल्लुफ़ से करम हो तो सितम होता है

कमाल अहमद सिद्दीक़ी