
Shweta Bajpai
नमस्कार, मैं श्वेता बाजपेई, वर्तमान में India.com हिंदी में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हूं. हिंदी पत्रकारिता में लगभग 10 वर्षों के अनुभव के दौरान मैंने लाइफस्टाइल, हेल्थ, एंटरटेनमेंट ... और पढ़ें
मां दु्र्गा को सपर्पित नवरात्रि का पर्व शुरू हो चुका है. इस दौरान मां की पूजा कर कई लोग व्रत रखते हैं. नवरात्रि के नौ दिन सिर्फ भक्ति और आस्था का समय नहीं होते, बल्कि यह शरीर को भी रीसेट करने का एक मौका देते हैं। इन दिनों ज़्यादातर लोग रोज़मर्रा के अनाज जैसे गेहूं, चावल या दाल छोड़कर साबूदाना, आलू, सिंघाड़े या कुट्टू जैसे फूड्स खाते हैं. अब व्रत तो श्रद्धा से जुड़ा है ही, लेकिन यह उतना ही ज़रूरी है कि खाना हेल्दी और एनर्जेटिक हो, वरना थकान और कमजोरी जल्दी घेर लेती है. पोषण विशेषज्ञ किरण कुकरजा का कहना है कि लोग व्रत में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो बार-बार दोहराई जाती हैं और यही छोटी-छोटी चूकें शरीर पर भारी पड़ती हैं.
1. साबूदाना ज़्यादा खा लेना-
साबूदाना व्रत का सबसे पॉपुलर फूड है, खिचड़ी, टिक्की, डोसा, जो चाहो बना लो, लेकिन दिक्कत ये है कि यह लगभग पूरा स्टार्च है. ज़्यादा खाओ तो ब्लड शुगर ऊपर जाएगा और थोड़ी देर में शरीर ढीला लगने लगेगा, इसलिए इसे हर बार थाली में भर देना समझदारी नहीं है.
2. प्रोटीन की अनदेखी-
व्रत में दालें और बीन्स नहीं होतीं, नॉनवेज तो होता ही नहीं, ऐसे में खाना कार्ब और फैट भारी बन जाता है. नतीजा जल्दी थकान. इस कमी को ड्राई फ्रूट्स, सीड्स और दूध-दही जैसी चीज़ें आसानी से पूरा कर सकती हैं, लेकिन लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसे में इनपर ध्यान दें और इनके फलहार में जोड़ें.
3. व्रत स्नैक्स को हेल्दी मान लेना-
बाज़ार में जो व्रत-फ्रेंडली चिप्स और नमकीन बिकते हैं, उनमें से ज़्यादातर खराब तेल में तले होते हैं. नाम भले व्रत का जुड़ा हो, लेकिन फायदा तो दूर ये उल्टा नुकसान पहुंचाते हैं. कभी-कभी खाना ठीक है, लेकिन इन्हें रोज़ का सहारा मत बनाइए.
4. हर डिश में आलू डाल देना-
व्रत का मतलब जैसे आलू—खिचड़ी, टिक्की, सब्ज़ी, हर जगह, लेकिन आलू पहले से स्टार्च भारी डाइट को और भारी बना देता है. इससे शुगर स्पाइक का खतरा बढ़ता है. इसे बैलेंस करने के लिए फाइबर वाली सब्जियां भी जरूर जोड़ें.
5. रोज वहीं रेसिपी दोहराना-
लोग अक्सर सामक चावल, कुट्टू चीला या वही साबूदाना टिक्की हर दिन बना लेते हैं. नतीजा पोषण में कमी और मन ऊब जाना. थोड़ी-थोड़ी वैराइटी रखना ज़रूरी है ताकि शरीर को भी अलग पोषक तत्व मिलें और मन भी खुश रहे.
असल में, नवरात्रि का व्रत सिर्फ धार्मिक रस्म नहीं है, यह मौका है शरीर को हल्का और शुद्ध करने का. बस छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दें—साबूदाना और आलू हर बार न खाएं, पैकेज्ड स्नैक्स से दूरी रखें और प्रोटीन-फाइबर का संतुलन बनाएं. ऐसा करेंगे तो पूरे नौ दिन न केवल भक्ति में मन लगेगा, बल्कि शरीर भी चुस्त-दुरुस्त रहेगा.
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