Sex Addiction: दुनिया भर के शोधकर्ताओं में हमेशा इस बात पर बहस होती रही है कि क्‍या सेक्‍स एडिक्‍शन यानी सेक्‍स की लत होती है? अगर ऐसा होता है कि तो इसकी परिभाषा क्‍या है, इससे पीड़ि‍त लोगों का बर्ताव कैसा होता है. Also Read - एडल्ट सीन से भरपूर है वेब सीरीज़ Gandii Baat Season 6, दिल पर काबू रखकर देखें ये तस्वीरें

अगर आप भी इन सब सवालों का जवाब चाहते हैं तो इस संबंध में किए गए शोधों के नतीजे हम आपके लिए लाए हैं. Also Read - Gandi Baat 6 में एडल्ट सीन देने वाली एक्ट्रेस Mahima Gupta की जानलेवा अदाएं, कयामत की शोखियां है क्या कहें...

क्‍या कहते हैं शोध

पॉर्न और सेक्स की लत से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए एक वेबसाइट ने ब्रिटेन में 21,000 लोगों पर सर्वे किया था. इन लोगों ने साल 2013 के बाद से वेबसाइट से मदद के लिए संपर्क किया था. इनमें से 91 प्रतिशत पुरुष थे और सिर्फ दस ने ही अपनी परेशानी के लिए डॉक्टर से परामर्श लिया था. इन लोगों ने माना था कि वे इस तरह के एडिक्‍शन से झूझ रहे हैं. और चाहकर भी इससे बाहर नहीं निकल पा रहे. Also Read - Gandii Baat 6 Hot Video: एडल्ट सीन से भरपूर 'गंदी बात' में फिर हुईं हदें पार, बैचेन कर सकता है वीडियो

लंबे समय से कंपल्सिव सेक्‍सुअल बिहेवियर (बाध्यकारी यौन व्यवहार) को विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी होने वाले ‘मैनुअल इंटरनेशनल क्लासीफिकेशन ऑफ डिसीज’ (आईसीडी ) में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है.

चौंकाने वाले नतीजे

कुछ महीनों पहले एक शोध किया गया था. इसमें पता चला था कि सेक्स की लत का शिकार कोई व्यक्ति जब पॉर्न देखता है तो उसके दिमाग में ऐसी गतिविधियां होती हैं, जैसी किसी नशे की लत के शिकार व्यक्ति के दिमाग में ड्रग्स दिखने पर होती है. शोध से जुड़े ओपन यूनिवर्सिटी में एमेरिटस प्रोफेसर डॉ फ्रेडरिक टोएट्स ने कहा, ‘किसी भी लत की दो तरह से पहचान की जा सकती है- आनंद या रिवॉर्ड पाने की चाह और इस व्यवहार के इर्द-गिर्द संघर्ष का होना’.

प्रोफेसर टोएट्स कहते हैं, ‘लत के शिकार लोग अल्पकालिक फायदा देखते हैं’. उसी की कामना में वे ऐसे काम करते हैं. हालांकि जयादातार लोग इस लत को स्‍वीकार नहीं करते.

सप्ताह में क‍ितनी बार सेक्स पर्याप्त है?

कनाडा के डलहौजी यूनिवर्सिटी में सेक्सुअल रिलेशनशिप पर शोध करने वाली एमी मुईस ने कहा कि कपल पर खुशहाली के लिए ज्यादा से ज्यादा सेक्स करने का दबाव नहीं होना चाहिए. मुईस ने भी इस विषय पर एक शोध किया था. उन्‍होंने कहा कि हर रोज की तुलना में सप्ताह में एक बार सेक्स करने की योजना ज्यादा ठीक लगती है. उनका ये शोध सोशल साइकोलॉजी एंड पर्सनैलिटी साइंस में प्रकाशित हुआ था.

इस शोध में कहा गया था कि सेक्स से खुशहाली बढ़ सकती है, ऐसा इसलिए सोचा जाता है क्योंकि कपल ज्यादा सेक्स करने से रिलेशनशिप में ज्यादा संतुष्ट होते हैं. इस अध्ययन में अमेरिका के 2400 कपल्स को शामिल किया गया था. मुईस कहती हैं कि सप्ताह में एक बार से अधिक सेक्स का कपल के बीच रोमांस की क्वालिटी पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ता.

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