Sexual Health को लेकर ज्‍यादातर लोग बात नहीं करते. नतीजतन सेक्‍स (Sex) को लेकर उनके दिमाग में जो भी धारणाएं होती हैं, वे उसे ही सच मान लेते हैं.

अमूमन ये धारणाएं टीनऐज में बननी शुरू होती हैं जब सेक्‍स को लेकर युवाओं में सबसे ज्‍यादा दिलचस्‍पी होती है.

इसके उलट हमारे समाज में सेक्‍स को लेकर खुलकर बात नहीं होती. सेक्‍स एजुकेशन के नाम पर भी बच्‍चों को ज्‍यादा कुछ नहीं बताया जाता, इसलिए जो वो खुद समझ लेते हैं वही उनका सच हो जाता है. ऐसे में कई Myth, सच की तरह लगने लगते हैं. चूंकि इन पर खुलकर बात नहीं होती इसलिए पता ही नहीं चलता कि सच क्‍या है.

आज हम आपको ऐसे ही Myths के बारे में बता रहे हैं, जिसे लोग सच मान लेते हैं.

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पीरियड में प्रेग्नेंसी नहीं होती

ज्‍यादातर लोग यही समझते हैं कि माहवारी के दौरान सेक्‍स करना सेफ होता है. इस समय में प्रेग्‍नेंसी कंसीव नहीं होती. पर ये सच नहीं है. डॉक्‍टर्स कहते हैं कि इस समय में कोई भी महिला, प्रेग्‍नेंट हो सकती है.

विदड्रॉल मैथेड से प्रेग्नेंसी नहीं होती

बिना कॉन्डम के अनसेफ सेक्‍स करने के लिए अगर आप विदड्रॉल मैथेड को अपना रहे हैं तो ये जान लें कि ये पूरी तरह से सेफ नहीं है. इस मैथेड में पतन के पहले बाहर निकाल लेना एक रिस्‍की तरीका है.

पहली बार सेक्स करने पर ब्लीडिंग होती है

हमारे देश में ऐसा मानने वालों की कमी नहीं है कि सेक्स करने पर ब्लीडिंग होना लड़की के वर्जिन होने की निशानी है. कई महिलाओं में तो यह झिल्ली जन्म से ही नहीं होती. कइयों के केस में कठोर व्यायाम, खेल-कूद के कारण ये झिल्ली फट जाती है.

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सेक्स से हार्ट अटैक हो सकता है

सेक्स का हार्ट अटैक से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है. अगर कभी इस तरह की कोई खबर आती है तो वो व्‍यक्ति की हेल्‍थ से संबंधित मामला हो सकता है. विज्ञान इसे मिथक मानता है.

सेक्स के पहले पेशाब करना चाहिए

कई लोग ये मानते हैं कि सेक्स के पहले पेशाब करने से एसटीआई यानी सेक्‍सुअली ट्रांस्मिटेड इन्‍फेक्‍शंस की संभावना कम हो जाती है. पर इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसके उलट, विज्ञान कहता है कि सेक्स के बाद पेशाब जरूर करना चाहिए. सेक्स के बाद पेशाब करने से बैक्टीरिया बाहर निकल जाते हैं, जिससे यूटीआई की संभावना कम होती है.

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