देश के महान क्रांतिकारी और शहीद भगत सिंह (Shaheed Bhagat Singh) की जयंती आज यानी 28 सितंबर को है. भगत सिंह उन लोगों में से है जिन्होंने देश के लिए अपने पूरे जिवन संघर्ष किया और देश के लिए ही शहीद हो गए. 23 साल की उम्र में ही उन्हें अंग्रेजों ने फांसी पर चढ़ा दिया. भगत सिंह भले ही शहीद हो गए लेकिन उनके नारे आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है. इंकलाब जिंदाबाद का नारा आज भी काफी प्रसिद्ध है. इसका मतलब है कि क्रांति की जय हो, इस नारे ने देशवासियों में जोश भरने का काम किया था.Also Read - controversy erupts as Delhi University textbook calls Shaheed Bhagat Singh a 'terrorist' | Delhi University की किताब में भगत सिंह को आतंकवादी बताया

देश के आजादी के लिए चले आंदोलनों में भगत सिंह की अहम भूमिका रही थी. जब जलियांवाला बाग कांड हुआ तो महज 12 साल के थे. इस घटना से उनके मन पर गहरा प्रभाव पड़ा. सन् 1920 में पहली बार वो महात्मा गांधी के अहिंसा आंदोलन में शामिल हुए. हालांकि, बाद में उनकी विचारधारा उनसे अलग हो गई लेकिन, 23 की उम्र में वह जो कुछ लिख गए वह उन्हें आजादी के दूसरे सिपाहियों से बिल्कुल अलग खड़ा करता है. ऐसे में एक नजर उनके कुछ अनमोल विचारों पर जो आज भी लोगों को याद हैं. Also Read - Uttar Pradesh: Shaheed Bhagat Singh, Raj Guru and Sukhdev in the morning and evening worship here | शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव की यहां होती सुबह-शाम पूजा

भगत सिंह के कुछ प्रेरणादायक विचार Also Read - Shaheed Diwas 2016: Know why is martyrs day is celebrated on March 23 । शहीद दिवस के मौके पर जाने शहीद ए आजम भगत सिंह के जीवन से जुड़ी ऐसी सच्चाई जो आपको हैरान कर देगी

1. जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं.

2. किसी भी इंसान को मारना आसान है, परन्तु उसके विचारों को नहीं. महान साम्राज्य टूट जाते हैं, तबाह हो जाते हैं, जबकि उनके विचार बच जाते हैं.

3. मेरा धर्म देश की सेवा करना है.

4. प्रेमी,पागल और कवि एक ही चीज से बने होते हैं.

5. अगर बहरों को सुनना है तो आवाज़ को बहुत जोरदार होना होगा. जब हमने बम गिराया तो हमारा धेय्य किसी को मारना नहीं था. हमने अंग्रेजी हुकूमत पर बम गिराया था . अंग्रेजों को भारत छोड़ना चाहिए और उसे आज़ाद करना चहिये.

6. बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती, क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है.

7. व्यक्तियों के कुचलकर वे विचारों को नहीं मार सकते.

8. कानून की पवित्रता तभी तक बनी रह सकती है, जब तक वो लोगों की इच्छा की अभिव्यक्ति करे.

9.राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आज़ाद है.

10. इस कदर वाकिफ है मेरी कलम मेरे जज़्बातों से, अगर मैं इश्क़ लिखना भी चाहूं, तो इंक़लाब लिख जाता हूं.