गर्मियों में अक्‍सर लोगों को पेट दर्द की समस्‍या होती है. इसका बड़ा कारण अपच होता है. पर कई बार ये पेट दर्द गंभीर समस्‍या की वजह से भी हो सकता है. पर क्‍या पेट दर्द को हल्‍के में लेना चाहिए. इस पर ध्‍यान ना देने से क्‍या होता है? Also Read - Alert: गर्मी के मौसम में होने वाली बीमारियों की List, ऐसे करें बचाव...

डॉक्‍टर्स कहते हैं कि पेटदर्द को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए. ये गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर (पेट की आंतों या पेट के कैंसर) की वजह से भी हो सकता है. Also Read - गर्मियों में रखें मेडिकल व्रत, पूरे सीजन नहीं होंगे बीमार..

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में चौथा सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को होने वाला कैंसर बन गया है. पिछले साल जीआई कैंसर के 57,394 मामले सामने आए. यह महिलाओं की तुलना में पुरुषों को ज्यादा प्रभावित करता है. Also Read - गर्भावस्था के दौरान हल्‍के में न लें पेट का दर्द, हो सकती हैं 7 परेशानियां, बरतें ये सावधानी

क्‍या है लक्षण
पेट दर्द होना. लगातार अपच बने रहना. मलोत्सर्ग की आदत में गड़बड़ी होना.

कैसे बढ़ता है ये कैंसर
यह साइलेंट किलर के रूप में बढ़ता है. शरीर के आंतरिक अंगों जैसे बड़ी आंत, मलाशय, भोजन की नली, पेट, गुर्दे, पित्ताशय की थैली, पैनक्रियाज या पाचक ग्रंथि, छोटी आंत, अपेंडिक्स और गुदा को प्रभावित करता है.

डॉक्‍टर्स की राय
मेदांता-द मेडिसिटी में इंस्टिट्यूट ऑफ डाइजेस्टिव एंड हेपोटोबिलरी साइंसेज में गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी के निदेशक डॉ. राजेश पुरी का कहना है, ‘स्क्रीनिंग, कोलोनोस्कोपी और एनबीआई एंडोस्कोपी की मदद से इस कैंसर का जल्द से जल्द पता लगाने में मदद मिलती है. प्रतिरोधी पीलिया और पित्ताशय की थैली में कैंसर की पुष्टि सीटी स्कैन, एमआरआई और ईआरसीपी से नहीं होती. मेडिकल दखल जैसे कोलनगियोस्कोपी की मदद से कैंसर को देखने और उनके ऊतकों का परीक्षण करने में मदद मिलती है. इससे पित्ताशय की थैली के कैंसर का जल्द पता लगाया जा सकता है, जिसका किसी परंपरागत उपकरण या रूटीन जांच से इस कैंसर का पता नहीं लगाया जा सकता’.

ईलाज
गट क्लिनिक इलाहाबाद के डॉ. रोहित गुप्ता के अनुसार, किसी भी कैंसर का इलाज करने के लिए बहुत जरूरी है कि सही समय पर हम उसके इलाज को शुरू करें, परंतु समस्या यही है कि बहुत से लोगों को इसका पता तभी चलता है जब कैंसर दूसरे या तीसरे स्टेज पर पहुंच जाता है. बढ़ती टेक्नोलॉजी के साथ जब से नए एंडोस्कोपस और हाई डेफिनेशन एंडोस्कोपी एंड कोलोनोस्कोपी की सुविधा उपलब्ध हुई है, डॉक्टर्स के लिए यह बहुत हो गया है जिससे वह समय रहते इसकी जांच और इलाज कर पा रहे है, क्योंकि जितनी जल्दी जांच होगी उतनी ही जल्दी हम उसका इलाज कर पाएंगे.