Swami Vivekananda Jayanti 2020: स्वामी विवेकानंद के जन्‍मदिवस को काफी धूमधाम से मनाया जाता है. उनका जन्म 12 जनवरी, 1863 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था. अध्यात्म के क्षेत्र में किए गए उनके कार्यों को देखते हुए हर साल उनकी जयंती 12 जनवरी को युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है. Also Read - केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाएं स्वामी विवेकानंद की गरीबों की मदद करने की सोच से मेल खाती हैं: पीएम मोदी

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– कोलकाता के गौरमोहन मुखर्जी स्ट्रीट के एक कायस्थ परिवार में विश्वनाथ दत्त के घर में 12 जनवरी, 1863 को जन्मे नरेंद्रनाथ दत्त (स्वामी विवेकानंद) को हिंदू धर्म के मुख्य प्रचारक के रूप में जाना जाता है. नरेंद्र के पिता पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखते थे. वह चाहते थे कि उनका पुत्र भी पाश्चात्य सभ्यता के मार्ग पर चले. मगर नरेंद्र ने 25 साल की उम्र में घर-परिवार छोड़कर संन्यासी का जीवन अपना लिया. परमात्मा को पाने की लालसा के साथ तेज दिमाग ने युवक नरेंद्र को देश के साथ-साथ दुनिया में विख्यात बना दिया. Also Read - Vivekananda Birth Anniversary: आखिर क्यों विश्व धर्म सम्मेलन में पहुंचे थे स्वामी विवेकानंद, पढ़ें रोचक कहानी

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– अपने युवा दिनों में नरेंद्र को अध्यात्म में रुचि हो गई थी. वह अपना अधिक समय शिव, राम और सीता की तस्वीरों के सामने ध्यान लगाकर साधना किया करते थे. उन्हें साधुओं और संन्यासियों के प्रवचन और उनकी कही बातें हमेशा प्रेरित करती थीं.

– पिता विश्वनाथ ने नरेंद्र की रुचि को देखते हुए आठ साल की आयु में उनका दाखिला ईश्वर चंद्र विद्यासागर मेट्रोपोलिटन इंस्टीट्यूट में कराया, जहां से उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की. 1879 में कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज की एंट्रेंस परीक्षा में फस्र्ट डिवीजन लाने वाले वे पहले विद्यार्थी थे.

– उन्होंने दर्शनशास्त्र, धर्म, इतिहास, सामाजिक विज्ञान, कला और साहित्य जैसे विभिन्न विषयों को काफी पढ़ा था, साथ ही हिंदू धर्मग्रंथों में भी उनकी रुचि थी. उन्होंने वेद, उपनिषद, भगवत गीता, रामायण, महाभारत और पुराण को भी पढ़ा. उन्होंने 1881 में ललित कला की परीक्षा पास की और 1884 में कला स्नातक की डिग्री प्राप्त की.

– नरेंद्रनाथ दत्त की जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ 1881 के अंत और 1882 के प्रारंभ में आया, जब वह अपने दो मित्रों के साथ दक्षिणेश्वर जाकर काली-भक्त रामकृष्ण परमहंस से मिले. यहीं से नरेंद्र का ‘स्वामी विवेकानंद’ बनने का सफर शुरू हुआ.

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