छात्र और शिक्षकों के बीच का रिश्‍ता केवल ज्ञान के आदान-प्रदान तक ही सीमित नहीं है. एक शिक्षक अपने छात्र को जीवन जीने का जरिया और नजरिया दोनों देता है. एक अच्‍छा शिक्षक छात्रों को नई चीजें सिखाने के लिए नए-नए तरीके अपनाता है और बदले में छात्रों से प्‍यार और सम्‍मान पाता है. छात्र और शिक्षक के बीच इस अनोखे रिश्‍ते पर बॉलीवुड में कई फिल्‍में बनी हैं. हम बता रहे हैं आपको ऐसे ही कुछ फिल्‍मों के बारे में, जिन्‍हें आप इस टीचर्स डे के दिन अपने बच्‍चों के साथ बैठ कर देख सकते हैं. Also Read - श्रीलंका से आकर बॉलीवुड में धाक जमाने वाली Jacqueline का बंगाली लुक... वाकई बेहद कातिल है

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यह एक आठ साल के बच्‍चे इशान की कहानी है जो डिस्‍लेक्सिया का शिकार है. बीमारी के चलते इशान को पढ़ाई में काफी मुश्किलें आती हैं. फिर उसकी मुलाकात नए आर्ट टीचर रामशंकर निकुंभ से होती है, जो इशान की रीडिंग और राइटिंग स्किल को बेहतर बनाने की कोशिश करता है. इशान और निकुंभ के रिश्‍ते क्‍लासरूम तक ही सीमित नहीं रहते, वे छात्र और शिक्षक के बीच संबंधों की व्‍यापकता के बारे में बताते हैं. फिल्‍म में इशान की भूमिका दर्शील सफारी और शिक्षक के रोल में आमिर खान हैं.

हिचकी (2018)

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यह फिल्‍म दर्शकों को हिचकी समस्‍या के बारे में तो बताती ही है, साथ ही शिक्षा के गैर परंपरागत तरीकों के बारे में भी जानकारी देती है. कहानी नैना माथुर की है जो पेशे से शिक्षक है लेकिन हिचकी की समस्‍या के चलते उसे नौकरी मिलने में परेशानी आती है. लेकिन नैना इस समस्‍या को अपने पेशे में रुकावट नहीं बनने देती. वह अपने छात्रों को पढ़ाने के अलग तरीके अपनाती है. अच्‍छी बात यह है कि ये तरीके उसके छात्रों को अनुशासन और शिक्षा का पाठ पढ़ाने में सफल होते हैं. फिल्‍म में टीचर की भूमिका रानी मुखर्जी ने निभाई है.

इकबाल (2005)

फोटो: Glamsham.com

फोटो: Glamsham.com

यह एक गूंगे-बहरे बच्‍चे इकबाल की कहानी है जो गांव में रहता है. यह भूमिका श्रेयस तलपड़े ने निभाई है. इकबाल भारतीय क्रिकेट टीम में खेलने के सपने देखता है और इसमें उसकी मदद करते हैं कोच मोहित. मोहित की भूमिका नसीरूद्दीन शाह ने निभाई है. इकबाल कैसे सभी मुश्किलों को पार करते हुए भारतीय क्रिकेट टीम तक पहुंचता है और इसमें कोच उसकी कैसे मदद करता है, पूरी फिल्‍म इसी पर केंद्रित है.

चॉक एन डस्‍टर (2016)

 

Photo: YouTube

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जूही चावला और शबाना आजमी की मुख्‍य भूमिकाओं वाली यह फिल्‍म प्राइवेट सेक्‍टर में शिक्षा की समस्‍याओं पर आधारित है. यह दो शिक्षकों की कहानी है. विद्या (शबाना आजमी) और ज्‍योति (जूही चावला) अपने पेशे से बेहद प्‍यार करती हैं. समस्‍या तब होती है जब स्‍कूल में नई प्रिंसिपल कामिनी (दिव्‍या दत्‍ता) आती है. कामिनी का रवैया तानाशाही है. वह शिक्षकों के बीच भेदभाव करती है, उन्‍हें प्रताडि़त करती है और बेवजह नौकरी से निकाल देती है. फिल्‍म में दिखाया गया है कि कैसे प्रिंसिपल के नापाक इरादों से शिक्षक स्‍कूल को बचाते हैं.

ब्‍लैक (2005)

photo: bollywoodment.blogspot

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यह फिल्‍म हेलेन केलर के जीवन के संघर्षों पर आधारित बताई जाती है. फिल्‍म में रानी मुखर्जी एक मूक-बधिर बच्‍ची मिशेल की भूमिका में हैं जो आंखों से देख भी नहीं सकती. फिल्‍म में उनके शिक्षक देवराज सहाय की भूमिका में अमिताभ बच्‍चन हैं जो आगे चलकर अल्‍जाइमर के मरीज हो जाते हैं. मिशेल के परिवार वाले शुरुआत में सहाय के टीचिंग के कठोर तरीकों को पसंद नहीं करते, लेकिन मिशेल अंतत: इसी की मदद से ग्रेजुएट हो जाती है.

3 इडियट्स (2009)

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यह फिल्‍म हर उम्र के दर्शकों की पसंद है. इसमें शिक्षा के परंपरागत तरीकों जैसे रट्टा लगाना, नोट्स बनाना आदि की जगह ऐसे तरीकों के बारे में बताया गया है जो मजेदार और रोचक हों. रैंचो की भूमिका में आमिर खान हैं जो आगे चलकर फुनशुक वांगडू के रूप में मशहूर होते हैं और बच्‍चों के लिए एक स्‍पेशल स्‍कूल चलाते हैं. फिल्‍म में कॉलेज के डायरेक्‍टर (बोमन ईरानी) और छात्रों के बीच रिश्‍तों के बारे में भी दिखाया गया हे.

जागृति (1954)

Photo: विकीपीडिया

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यह फिल्‍म एक अमीर लड़के अजय (राजकुमार गुप्‍ता) की कहानी है जो बचपन में बेहद शरारती था. इसी चलते अजय को उसके दादाजी बोर्डिंग स्‍कूल भेज देते हैं. स्‍कूल में ही अजय की मुलाकात शेखर (अभि भट्टाचार्य) से होती है जो छात्रों को शिक्षित और अनुशासित करने के लिए अलग तरीके अपनाते हें ओर कामयाब भी होते हैं.