दिल्ली सरकार थैलेसीमिया के मरीजों को बड़ी सुविधा देने जा रही है. इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.

दिव्यांगता आयुक्त टी.डी. धारीयाल ने कहा है कि थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया और हीमोफीलिया को ‘आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम 2016’ में शामिल किया जा चुका है और थैलेसीमिया अब दिव्यांगता के तहत उच्च शिक्षा के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण के दायरे में आता है.

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नेशनल थैलेसीमिया वेलफेयर सोसाइटी ने रविवार को ’25वें अंतर्राष्ट्रीय थैलेसीमिया दिवस’ के मौके पर नई दिल्ली में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था. इसमें धारीयाल ने कहा कि रोजगार में हालांकि ऐसा कोई आरक्षण नहीं है. लेकिन इन मरीजों को स्वास्थ्य के आधार पर नौकरी देने से इंकार नहीं किया जा सकता है और न ही इनके साथ कोई भेदभाव किया जा सकता है. थैलेसेमिया के मरीज नौकरियों में आरक्षण के अलावा दिव्यांगों के लिए बनाई गई सभी योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के ब्लड सेल कोओर्डिनेटर और वरिष्ठ सलाहकार विनिता श्रीवास्तव ने बताया कि हीमोलोबिनोपेथीज (थैलेसीमिया और सिकल सेल एनिमिया) के प्रबंधन और रोकथाम पर राष्ट्रीय दिशा-निर्देश 2016 में प्रकाशित किए जा चुके हैं. इस नीति का ड्राफ्ट तैयार है जिसकी अधिसूचना चुनावों के बाद किसी भी समय जारी की जा सकती है. उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया के मरीजों के लिए हर राज्य में उचित धनराशि आवंटित की गई है.

कार्यक्रम को टीसीएस, सोडेक्सो, एचसीएल, सॉयल, वॉलमार्ट, जैक्वार और आरएनए टेक्नोलॉजी, आईपी अटॉर्नी का समर्थन मिला, जिन्होंने थैलेसीमिया के मरीजों के संदर्भ में नीतियों पर बातचीत की.

इस मौके पर थेलेसीमिया के 100 से अधिक मरीजों ने कोरपोरेट्स के साथ बातचीत की और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की.

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