नई दिल्‍ली: कहते हैं पानी ही जिंदगानी है. क्‍योंकि मानव शरीर के वजन का दो तिहाई हिस्‍सा पानी से बना होता है. यह शरीर को हाइड्रेटेड रखने में, अपशिष्‍ट शरीर से बाहर निकलने में और ब्‍लड सरर्कुलेशन में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह रीढ़ की हड्डी और संज्ञानात्‍मक स्‍वास्‍थ्‍य को बनाए रखता है.Also Read - Ayurveda For Stress Relief : मानसिक तनाव को कम करने के लिए ये आयुर्वेदिक टिप्स आएंगे काम, आज ही अपनाएं | वीडियो देखें

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हर दिन, हमारा शरीर पानी की मात्रा खो देता है और इसलिए यह जरूरी है कि पानी का सेवन इस तरह किया जाना चाहिए कि हमारा शरीर इसके हर औंस को अवशोषित कर सके. हमारे परिवार के बुजुर्ग हमें खड़े रहते हुए पानी के सेवन करने के लिए मना करते हैं लेकिन क्‍या आपको इसका कारण मालूम हैं. शायद नहीं. आईए जानते हैं कि भारतीय आयुर्वेद इसके बारे में क्‍या कहता है. आयुर्वेद की प्राचीन प्रथाओं के अनुसार खड़े होकर पानी पीने से हमारे शरीर को इसका पूरा लाभ उठाने में असक्षम रहता है.

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ये होता है असर

आप कैसे पानी पीते हैं, इस पर आप दिन भर कैसा महसूस करेंगे, ये भी निर्भर करता है. जब आप खड़े होकर पानी पीते हैं तो आपकी नसें तनाव की स्थिति में होती हैं. यह फिर सहानुभूति प्रणाली या लड़ाई प्रणाली को सक्रिय करता है. खड़े होकर पानी पीना और पानी पीने की गति दोनों एक-दूसरे को साथ जुड़े हुए हैं. खड़े होकर पानी पीने से उस पानी की गति तेज हो जाती है और इससे गठिया और जोड़ों की क्षति जैसी समस्‍याएं सामने आती हैं. जैसे भोजन धीरे-धीरे करने से पाचन प्रक्रिया सही होती है और पानी पीने की प्रक्रिया को लेकर भी यही सच है.

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