हम सभी चाहते हें कि अच्‍छी से अच्‍छी आदतों को सीखें. उन्‍हें अपने व्‍यवहार में लाएं. पर क्‍या ऐसा हो पाता है?

अक्‍सर हम बड़े जोश के साथ अच्‍छे काम करना शुरू करते हैं. पर कुछ दिन बीतते ही हमारा जोश ठंडा पड़ने लगता है. आखिर ऐसे में क्‍या कर सकते हैं…

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अब वैज्ञानिकों ने इसका उपाय बताया है. उन्‍होंने कहा है कि अगर आप जिम जाने और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करने जैसी अच्छी आदतें अपनाना चाहते हैं तो आपको इनको तब तक दोहराना पड़ेगा, जब तक ये आपकी आदतों से चिपक न जाएं.

शोधकर्ताओं ने ये बात अध्‍ययन के आधार पर कही है. इसके लिए उन्‍होंने एक मॉडल बनाया, जो बताता है कि अच्छी और बुरी आदतें आपके काम से आपको मिली संतुष्टि से ज्यादा, आपके काम की निरंतरता पर निर्भर करती हैं.

ब्राउन यूनिवर्सिटी के असिसटेंट प्रोफेसर अमिताई शेनहाव ने कहा, ‘मनोवैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि एक सदी से हमारी आदतें कैसे बनती हैं और सबसे प्रमुख प्रश्न ये है कि हम जो करते हैं, उसके मुकाबले कितनी आदतें हैं, जो हम चाहते हैं’.

शेनहाव ने कहा, ‘हमारी आदतें हमारी पिछली क्रियाओं के कारण बनती हैं, लेकिन निश्चित परिस्थितियों में सर्वश्रेष्ठ परिणाम लाने के लिए उन आदतों के स्थान पर हमारी इच्छाएं आ जाएंगी’.
(एजेंसी से इनपुट)

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