Ayurveda Goals in 2021: कई बार जब हमें प्रकृति से चेतावनी के रूप में आए किसी स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ता है, तब हम अच्छे स्वास्थ्य की अविश्वसनीय कीमत का एहसास करते हैं, जो समृद्धि का आधार है. एक दीर्घ, रोगमुक्त और आनंदपूर्ण जीवन सदा ही मानव के लिए एक आदर्श रहा है. हम रोगों से लड़ने और उनके लक्षणों से निदान के उपायों की खोज कर रहे हैं, लेकिन यदि हमने अनुभव किया कि उत्तम और सबसे जीवंत स्वास्थ्य का खजाना हमारे ही पैरों तले है, तब क्या होगा ? Also Read - देशभर में आज डॉक्टरों की हड़ताल, सरकार के इस फैसले के विरोध में IMA ने स्ट्राइक का किया ऐलान

हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली जीवनशैली से अवगत होने और दैनिक जीवन में कुछ सरल अभ्यासों को अपनाने से आपके स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में दीर्घ कालीन सुधार होता है. एक स्वस्थ और अधिक पूर्ण जीवन की ओर बढ़ने का एक श्रेष्ठ उपाय वे सरल और प्राप्य लक्ष्य हैं जो आपकी जीवन शैली को उत्तम बनाने के लिए आपको अधिक प्राकृतिक और स्वस्थ बनाने में मदद करते हैं. यहाँ आर्ट ऑफ़ लिविंग स्वास्थ्य विशेषज्ञों के कुछ सुझाव दिए गए हैं जो आपको 2021 में आयुर्वेदिक उपाय से अपने स्वास्थ्य लक्ष्यों को निर्धारित करने और प्राप्त करने में मदद करेंगे. Also Read - कोरोना संक्रमण के बाद होने वाली चुनौतियों से निपटने में आयुर्वेद और योगा बेहद मददगार है: नाइक

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नियमित समय पर सोना और जागना, तरोताजा करने वाली नींद और खुशनुमा सुबहें अनिवार्य रूप से स्वस्थ जीवन की ओर पहला कदम है. आयुर्वेद के अनुसार रात 10 बजे से पहले बिस्तर पर जाना और ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) में जागना, उत्तम पाचनशक्ति, मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक बल और बेहतर समय प्रबंधन के लिए बहुत आवश्यक है.

अपने शरीर की सुनें

जब पिछला भोजन पचा नहीं होता है, हमारा शरीर तब संकेत देता है किन्तु फिर भी हम अपने पाचन तंत्र पर अधिक भोजन का बोझ डालते रहते हैं जो न केवल पाचन को सुस्त बनाता है बल्कि विषाक्त पदार्थों के संचय की ओर भी ले जाता है.

  • भोजन तभी करें जब आपको भूख लगे, या फिर अपने आप को हल्के विकल्प, जैसे कि कच्चे नारियल का पानी या ककड़ी के कुछ टुकड़ों से ही सन्तुष्ट करें .
  • जब आपको प्यास लगी हो तो आप चाहे कितने भी व्यस्त क्यों न हों, पानी के सेवन को स्थगित न करें.
  • एक और बड़ी भूल जो हम करते हैं, वह प्राकृतिक आग्रहों जैसे कि हमारी आंतों या मूत्राशय को खाली करने को अनदेखा करना या स्थगित करना है, अथवा जब कोई प्राकृतिक आग्रह न हो तो शारीरिक संस्थान पर अनावश्यक दबाव डालना. क्या आप जानते हैं कि सूर्योदय से पहले शरीर में वात दोष मुख्य होता है? अपान वायु, जो नीचे की दिशा में चलती है और शरीर से अपशिष्ट पदार्थ और विषाक्त पदार्थों के उन्मूलन के लिए जिम्मेदार है, दिन निकलने से पहले की अवधि में सक्रिय रहती है. इसलिए हम सभी को उस दौरान आंतों और मूत्राशय को खाली करने के लिए प्राकृतिक आग्रह महसूस होता है.

तेल से कुल्ला करना

एक चम्मच कच्चा नारियल तेल / इदिमादादि तेल / तिल का तेल और एक चम्मच पानी अपने मुंह में लें और इसे 2-5 मिनट के लिए मुख में घुमाएं . बाद में गुनगुने पानी से कुल्ला करें. अपने सिस्टम में विषाक्त पदार्थों को जमा होने से रोकने, पाचन को बढ़ाने, बेहतर लार स्राव हेतु, शरीर में क्षारीयता बनाए रखने और मुख के स्वास्थ्य में सुधार के लिए सुबह सबसे पहले इसे करें.

व्यायाम, योग और ध्यान

समुचित शारीरिक व्यायाम से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है, अच्छा होगा यदि इसे दोपहर से पहले किया जाए . उत्तम चयापचय, परिसंचरण और मानसिक स्वास्थ्य के विकास के लिए अपने शरीर को संचालित करना चाहिए. आयुर्वेद संतुलन को बहुत महत्व देता है और इसलिए कठिन व्यायाम करने की सलाह नहीं दी जाती है, विशेष रूप से ग्रीष्म ऋतु में, जब शरीर में ओजस पहले से ही कम होता है. योग और ध्यान को अपने जीवन में सम्मिलित करें और आपको उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, विचारों की स्पष्टता, तीव्र बुद्धि और स्मृति के रूप में अंतहीन उपहारों से पुरस्कृत किया जाएगा, और सबसे महत्वपूर्ण, आप पहले से अधिक आनंदित होंगे !

धूप का आहार :

सूर्य हमारी ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत है; हम जो भी भोजन खाते हैं, वह विकास के लिए सूर्य के प्रकाश पर निर्भर करता है और फिर भी हम अपने दैनिक जीवन में इसके महत्व को अनदेखा करते हैं. दिन में 15-20 मिनट के लिए सुबह की धूप में रहना न केवल आपके विटामिन डी के स्तर को बनाए रखेगा, बल्कि आपकी नींद की गुणवत्ता में सुधार करेगा, आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली और मानसिक स्वास्थ्य को काफी बढ़ाएगा.

स्वत: अभ्यंगम्

तिल के तेल जैसे प्राकृतिक तेलों के द्वारा नियमित रूप से मालिश करने से वात (वायु और ईथर के तत्वों का संयोजन) संतुलन में रहेगा, परिसंचरण और हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार होगा, जोड़ों की समस्याओं को रोका जा सकेगा और आपकी त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनी रहेगी. त्वचा पर तेल के बेहतर अवशोषण के लिए, स्नान करने से आधे घंटे पहले मालिश खत्म करना सबसे अच्छा है.

भोजन का सेवन:

  • अपने भोजन को खाते समय किसी भी अन्य गतिविधि में संलग्न होने से बचें और आपका सारा ध्यान भोजन पर ही हो ; धीरे-धीरे और सावधानी से खाने से पाचन में सुधार होगा और यह बेहतर तृप्ति लाएगा साथ ही अधिक खाने से रोकेगा.
  • भोजन के तुरंत पहले या बाद में पानी या जूस पीने से बचें.
  • खाने के तुरंत बाद स्नान के लिए मत जाएं क्योंकि यह पाचन को धीमा कर देगा. कम से कम आधे घंटे का अंतर बनाए रखें. बेहतर पाचन अग्नि के लिए खाने से पहले अपना स्नान करें.
  • भोजन के तुरंत बाद न सोएं. सोने से कम से कम 2 घंटे पहले अपना डिनर खत्म करें. भोजन के बाद कुछ मिनट के लिए बैठें, और फिर इससे पहले कि आप सोने के लिए जाएं, पाचन में सुधार करने के लिए 15 मिनट घर के आसपास टहल सकते हैं