आपकी ये छोटी सी गलती बन सकती है टाइफाइड की बड़ी वजह! आयुर्वेद से जानिए बचाव और इलाज के उपाय

टाइफाइड एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो शरीर को अंदर से कमजोर कर देती है और मरीज को लंबे समय तक तेज बुखार, कमजोरी व पेट की समस्याओं से जूझना पड़ता है. आयुर्वेद में इसके लक्षणों को कम करने और शरीर को दोबारा मजबूत बनाने के लिए कई प्रभावी और प्राकृतिक उपाय बताए हैं, जिन्हें सही तरीके से अपनाने पर काफी हद तक राहत मिल सकती है.

Published date india.com Published: January 5, 2026 10:32 PM IST
Typhoid Causes Due To Daily Habits
Typhoid Causes Due To Daily Habits

आजकल टाइफाइड एक आम लेकिन गंभीर समस्या बन गई है. यह बीमारी खासतौर पर गंदे पानी, खराब खानपान और खराब जीवनशैली के कारण फैलती है. अक्सर लोग सोचते हैं कि सिर्फ संक्रमित व्यक्ति से ही बीमारी होती है, लेकिन असल में आपकी रोजमर्रा की कुछ आदतें भी टाइफाइड का बड़ा कारण बन सकती हैं और आपको एक बड़ी समस्या का शिकार बना सकती हैं.

क्या होता टाइफाइड और क्या है इसकी लक्षण

यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होता है. यह बैक्टीरिया आंत, खून और यकृत-प्लीहा तक फैलता है और तेज बुखार, पेट दर्द, कमजोरी, भूख न लगना और जीभ पर सफेद परत जैसी समस्याएं पैदा करता है. अगर समय पर इलाज न हो तो यह आंतों में अल्सर, आंतरिक रक्तस्राव और अन्य गंभीर समस्याएं भी पैदा कर सकते हैं.

कैसे करें बचाव?

टाइफाइड से बचने के लिए, हमेशा हाथ धोकर ही खाना खाएं, खुले में रखा या बासी खाना खाने से बचे. इसके अलावा ये समस्या और भी कई कारणों से हो सकती है, जिनमें साफ-सफाई का ध्यान न रखना या घर में दूषित पानी पीना जैसी छोटी-छोटी गलतियां लंबे समय में हमारे शरीर के पाचन तंत्र को कमजोर कर देती हैं, जिससे टाइफाइड जैसी बीमारी आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाती है.

टाइफाइड को लेकर क्या कहता है आयुर्वेद

आयुर्वेद में टाइफाइड को मियादी ज्वर कहा गया है. आयुर्वेद के अनुसार जब हमारी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, तब रोगाणु आसानी से शरीर में पनपते हैं. इसलिए टाइफाइड से बचाव और इलाज के लिए आयुर्वेद में ज्वरनाशन, अग्नि दीपना, पाचन सुधार और ओज-वर्धन जैसे सिद्धांतों पर जोर देते हुए कुछ खास उपाय बताए हैं.

कैसे पाए डाइफाइड से राहत?

आयुर्वेद के मुताबिक, गिलोय का रस इम्युनिटी बढ़ाने और बुखार कम करने में मदद करता है. इसके अलावा तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा बैक्टीरिया नष्ट करने के लिए बेहद असरदार है. साथ ही मुलेठी, लौंग का पानी और सुदर्शन चूर्ण भी शरीर की ताकत और पाचन सुधारने में मदद करते हैं. आयुर्वेद में रोजमर्रा की आदतों का भी खास ध्यान रखने की सलाह दी जाती है. साफ पानी पीना, पका और ताजा खाना खाना, हाथ धोना, पाचन सुधारने वाले हल्के भोजन जैसे मूंग दाल की पतली खिचड़ी, छाछ या पका केला लेना, और नियमित रूप से आयुर्वेदिक हर्ब्स का सेवन करना टाइफाइड से बचाव में बहुत कारगर है.

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इनपुट- आईएएनएस

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे केवल सुझाव के तौर पर लें. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.

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