मॉर्डन लाइफस्टाइल के कारण आजकल युरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन(यूटीआई) इंफेक्शन काफी आम समस्या बन गया है. इसके पीछे एक बड़ा कारण गंदे पब्लिक टॉयलेट इस्तेमाल करना भी है. हालांकि यह रोग खतरनाक तो नहीं है लेकिन समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया तो यह किडनी पर बुरा असर डाल सकता है. वहीं दूसरी तरफ अगर घर के टॉयलेट की नियमित रूप से सफाई न हो तो भी ये रोग आपको अपना शिकार बना सकता है. Also Read - बिहार के इस अनोखे दफ्तर में काम के साथ कर्मचारी करते हैं योग, जानिए क्या है वजह

ऐसे फैलता है संक्रमण
युरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन इतनी आम बीमारी है कि अमूमन हर महिला को अपनी जिंदगी में कभी-न-कभी इसका इलाज करवाना पड़ता है. यूटीआई तब होता है, जब बैक्टीरिया या फंगस हमारे पाचन तंत्र से निकल कर या फिर किसी अन्य माध्यम से पेशाब मार्ग की दीवारों पर चिपक जाते हैं और तेजी से बढ़ते चले जाते हैं. अगर संक्रमण को लंबे समय तक अनदेखा किया जाए तो ये बैक्टीरिया ब्लैडर और किडनी तक पहुंच जाते हैं और उन्हें नुकसान पहुंचा देते हैं. Also Read - वर्क प्लेस के love Affairs होते हैं टिकाऊ, लेकिन इस नुकसान का भी होता है डर

यह हो सकती है वजह
शौच के बाद सही तरीके से सफाई नहीं करना, पेशाब लगने के बावजूद बहुत देर तक शौचालय न जाना, शारीरिक संबंध बनाने के बाद निजी अंगों की सफाई पर ध्यान न देने से भी कई बार यह संक्रमण होता है. इसके अलावा कोई ऐसी बीमारी, जिससे ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं होता है जैसे किडनी स्टोन आदि से भी यूटीआई होने की आशंका बढ़ती है. डायबिटीज के मरीजों को भी इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है. इसके अलावा मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के कारण भी इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. Also Read - Tips: बढ़ानी है उम्र तो आज ही अपनाएं ये आदतें, ऐसे करें शुरुआत...

क्या हैं लक्षण
बार-बार पेशाब लगना, पेशाब करने के दौरान जलन, बुखार, बदबूदार पेशाब होना और पेशाब का रंग धुंधला या फिर हल्का लाल होना और पेट के निचले हिस्से में दबाव महसूस होना इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं. यूटीआई के साथ मुख्य समस्या यह होती है कि एक बार ठीक होने के बाद इस संक्रमण के दोबारा होने की आशंका काफी ज्यादा होती है. अमूमन 50 प्रतिशत महिलाओं को एक साल के भीतर दोबारा यह संक्रमण हो जाता है. इसलिए यूटीआई होने पर एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा करना जरूरी होता है. साथ ही दवा बंद करने के एक सप्ताह बाद फिर से युरिन टैस्ट करवाने की सलाह दी जाती है, ताकि दोबारा संक्रमण होने की आशंका को दूर किया जा सके.

पचास के बाद पुरुषों को होता है खतरा
पुरुषों की तुलना में महिलाओं को यह बीमारी ज्यादा होती है, क्योंकि महिलाओं के शरीर का भीतरी ढांचा ऐसा होता है कि उसमें यह संक्रमण तेजी से फैल जाता है. 50 साल से कम आयु के पुरुषों में यह बीमारी बहुत कम होती है. ज्यादा उम्र के पुरुषों को यह बीमारी प्रोस्टेट ग्रंथि के बड़ा होने, डाइबिटीज, एचआईवी या फिर युरिनरी ट्रैक्ट में स्टोन होने के कारण होती है. इस तरह की बीमारियों से ग्रस्त लोगों को विशेष तौर पर सावधान रहना चाहिए.