Acute Encephalitis Syndrome इन दिनों चर्चा में है. इसके कारण बिहार में बच्‍चों की मौत का सिलसिला जारी है.

बिहार में चमकी बुखार से अब तक 112 मौत, ओडिशा में भी AES की दहशत, लीची की जांच का आदेश

100 से अधिक बच्‍चों की जान ले चुके अक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम को चमकी बुखार भी कहा जाता है. अब खबरें आ रही हैं कि लीची खाने से ये बीमारी फैलती है. पर सच क्‍या है?

चमकी बुखार
चमकी बुखार यानी AES, शरीर के मुख्य नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है. खासतौर पर ये बच्चों के लिए जानलेवा साबित होता है.

चमकी बुखार के लक्षण
इसकी शुरुआत तेज बुखार से होती है. शरीर में ऐंठन महसूस होती है. शरीर के तंत्रिका संबंधी कार्यों में रुकावट आने लगती है. मानसिक भटकाव महसूस होता है. बच्चा बेहोश हो जाता है, दौरे पड़ने लगते हैं. घबराहट महसूस होती है, कुछ मामलों में पीड़ित व्यक्ति कोमा में भी चला जाता है. समय पर इलाज न मिले तो पीड़ित की मौत हो जाती है.

क्‍या लीची है जिम्‍मेदार?
कुछ साल पहले ‘द लैन्सेट’ नाम की मेडिकल जर्नल ने एक रिसर्च रिपोर्ट प्रकाशित की थी. ये रिपोर्ट करीब 3 साल तक चले रिसर्च के बाद प्रकाशित की गई थी. इसमें कहा गया था कि लीची में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पदार्थ जिन्हें hypoglycin A और methylenecyclopropylglycine (MPCG) कहा जाता है, ये शरीर के लिए फायदेमंद नहीं होते. दरअसल इनकी वजह से शरीर में फैटी ऐसिड मेटाबॉलिज़म बनने में रुकावट पैदा होती है. इससे ब्लड-शुगर लो लेवल में चला जाता है और मस्तिष्क संबंधी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं. दौरे पड़ने लगते हैं.

कैसे लीची से चमकी बुखार का खतरा?
इस रिपोर्ट में कहा गया था कि अगर रात का खाना न खाने की वजह से शरीर में पहले से ब्लड शुगर का लेवल कम हो और सुबह खाली पेट लीची खा ली जाए तो अक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम AES का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. इसमें कहा गया था कि गर्मी के मौसम में बिहार के मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाके में खूब लीची की पैदावार होती है. ऐसे में वहां के गरीब परिवार के बच्चे, जो पहले से कुपोषण का शिकार होते हैं, वे रात को खाना नहीं खाते और सुबह नाश्ता करने की बजाए खाली पेट खूब लीची खाने लगते हैं. इससे शरीर का ब्लड शुगर लेवल अचानक लो हो जाता है और बीमारी का खतरा रहता है.