बच्‍चों में होती है Club Foot की समस्‍या? क्‍या है ये? जानें इसका इलाज...

बच्‍चों में होने वाली Club Foot की समस्‍या का अब उपचार संभव है. ये बात एक नए शोध में सामने आई है.

Published: March 28, 2019 2:24 PM IST

By India.com Hindi News Desk | Edited by Arti Mishra

बच्‍चों में होती है Club Foot की समस्‍या? क्‍या है ये? जानें इसका इलाज...

बच्‍चों में होने वाली Club Foot की समस्‍या का अब उपचार संभव है. ये बात एक नए शोध में सामने आई है.

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क्‍या है Club Foot
ये जन्मजात ऑर्थोपेडिक विसंगति है. ये एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चों के पैर अंदर की तरफ मुड़े होते हैं. इस कारण वे सामान्य रूप से चलने-फिरने में अक्षम होते हैं.

क्‍या होता है बच्‍चे पर असर
यह एक जन्मजात दोष है जिसमें पैर या तो अंदर की तरफ या नीचे की ओर घुमे हुए होते हैं. नतीजतन, इन बीमारियों से पीड़ित बच्चे बिल्कुल भी नहीं चल पाते हैं, यहां तक कि वे खुद बाथरूम तक भी नहीं जा पाते हैं.

डॉक्‍टर्स की राय
नारायण सेवा संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ अमरसिंह चूंडावत कहते हैं, ‘आम तौर पर, जन्म के एक सप्ताह के भीतर इस स्थिति का पता लग जाता है. इस स्थिति का इलाज इसका पता लगने के तुरंत बाद शुरू होता है और ऐसे मामलों में प्री-सर्जिकल और पोस्ट-सर्जिकल उपचार भी उपलब्ध हैं’.

चिकित्सा विज्ञान के शोधकर्ता क्लबफुट के कारणों के बारे में ठीक-ठीक से कुछ कह नहीं पाते, पर उनका मानना है कि यह गर्भ में एम्नियोटिक द्रव की कमी से संबंधित है, जो इस विकार की आशंका को बढ़ा सकता है. चूंकि एम्नियोटिक द्रव फेफड़ों, समग्र मांसपेशियों और पाचन तंत्र के विकास में मदद करता है. हालांकि, गर्भावस्था के दौरान एक और कारण धूम्रपान हो सकता है जो बच्चे में इस विकार को जन्म देने की आशंका को बढ़ाता है. जिन बच्चों का पारिवारिक इतिहास है, उनके इस विकार से पीड़ित होने का सबसे ज्यादा जोखिम है.

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उपचार
प्रारंभिक स्थिति में इसका उपचार कराने से स्थिति के अधिक गंभीर होने की आशंका को कम किया जा सकता है. इस बीमारी के उपचार को मुख्य रूप से दो चरणों में विभाजित किया जाता है, पारंपरिक रूढ़िवादी उपचार और शल्य चिकित्सा उपचार.

रूढ़िवादी उपचार के साथ, पोंसेटी पद्धति है, जिसके तहत पैरों की कास्टिंग के बाद 5-8 सप्ताह तक मसल मनिप्यलेशन होता है. ज्यादातर मामलों में, कास्टिंग 5-7 दिनों के भीतर हटा दी जाती है और आवश्यकतानुसार दोहराई जाती है. मरीज के पैरों को एक पट्टी के सहारे कस कर बांधा जाता है, फिर एक साधारण बार और जूते के उपकरण में रखा जाता है. इस तरह पैरों को एक उचित स्थान पर रखा जाता है, ताकि वे आगे और खराब नहीं होने पाएं.

Club Foot के सर्जिकल उपचार के तहत, ऐसी कई शल्य चिकित्सा हैं, जिन्हें कोई भी चुन सकता है. यह सब हालत की गंभीरता पर निर्भर करता है. एक ऑथोर्पेडिक सर्जन पैर की बेहतर स्थिति के लिए स्नायु को लंबा करने का विकल्प चुन सकता है. पोस्टऑपरेटिव देखभाल में दो से तीन महीने तक कास्टिंग शामिल है, जिसके बाद रोगी को इस स्थिति की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए ब्रेस पहनना पड़ता है.

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वरिष्ठ चिकित्सक डॉ अमरसिंह चूंडावत कहते हैं, ‘यह आवश्यक है कि बच्चे को जन्म के तुरंत बाद उपचार मिलना चाहिए. इसके अलावा, यह भी जरूरी है कि माता-पिता को बच्चे की स्थिति को लेकर गलत धारणाएं बनाए बिना डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए’.

नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा, ‘भले ही क्लबफुट को सुधारा नहीं जा सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह देखा जाता है कि जिन बच्चों का इलाज जल्दी हो जाता है, वे बड़े होने पर सामान्य जूते पहन सकते हैं और सामान्य और सक्रिय जीवन जीते हैं’.
(एजेंसी से इनपुट)

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Published Date: March 28, 2019 2:24 PM IST