नई दिल्ली: इन दिनों हमारे देश में हैशटैग मीटू यानी #MeToo कैंपेन चल रहा है. सोशल मीडिया पर ये सुपरहिट है. महिलाएं बड़ी संख्या में सामने आ रही हैं और अपने शोषण की दास्तां बयां कर रही हैं. Also Read - ASI ने लड़की को अपने वाहन में बिठाया, बीच रास्‍ते बिगड़ी नीयत और फिर..

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ये सब पोस्ट, आरोप-प्रत्यारोप के बीच आप भी ये जानने को उत्सुक होते होंगे कि आखिर यौन उत्पीड़न के दायरे में क्या-क्या आता है? क्या महिला कर्मचारी से हंसकर बात करना, मैसेज भेजना या चाय पीना भी इस आरोप के दायरे में आपको ला सकता है. जानें क्या कहता है कानून. Also Read - Thappad Movie Review: मर्दानगी पर पड़ा ‘थप्पड़’

क्या है कानून

यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए साल 2013 में दो कानून बनाए गए. इसमें कहा गया है कि किसी महिला को उसकी सहमति के बिना छूना, मना करने के बावजूद छूना या उसकी कोशिश करना, यौन संबंध बनाने का प्रयास, सेक्सुअल बातें, पोर्न की बातें या दिखाना, ये सब यौन उत्पीड़न है. जहां तक ऑफिस की बात है तो इसके लिए सेक्सुअल हैरेसमेंट ऑफ़ वुमेन ऐट वर्कप्लेस (प्रिवेन्शन, प्रोहिबिशन एंड रिड्रेसल) कानून बनाया गया है.

sexual harassment

क्या करना है सही

महिला कर्मचारी के साथ आप उसकी सहमति से मजाक कर सकते हैं. उसकी तारीफ या खाना-पीना, चाय-कॉफी पी सकते हैं. जोक्स करना, घूमना-फिरना सब हो सकता है अगर उसकी सहमति से किया जाए तो. इसी तरह सहमित से फिजिकली टच कर सकते हैं.

क्या कहलाता है यौन उत्पीड़न

अगर कोई मर्द किसी महिला के प्रति आकर्षित हो तो वो उसे साफ तौर पर कहकर ये बता सकता है. बिन कुछ कहे अश्लील इशारे करना, मैसेज भेजना यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है. अगर महिला किसी को मना करे और उसके बावजूद भी वो उसे सेक्सुअली छूने का प्रयास करे, छुए तो वो यौन उत्पीड़न है. जरूरी बात ये है कि महिला अगर ‘ना’ कहे और उसके बावजूद भी आप सेक्सुअली बिहेव करें, जबरदस्ती करें तो ये उत्पीड़न है.

किससे करें शिकायत?

कानून कहता है कि जिस संस्थान में दस से ज्यादा कर्मचारी हों, वहां पर इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी बनाना जरूरी है. इसकी अध्यक्ष सीनियर पद पर काबिज महिला होनी चाहिए. इसमें जितने सदस्य हों उनमें 50 फीसदी औरते हों. एक सदस्य एनजीओ की महिला कर्मचारी हो. यहां कोई महिला कर्मचारी शोषण की शिकायत कर सकती है. अगर संस्थान में ये कमेटी नहीं है तो शिकायत जिला स्तर पर बनाई गई लोकल कम्प्लेंट्स कमेटी को दे सकते हैं. या फिर लोकल पुलिस से शिकायत कर सकती हैं. इसके बाद कमेटी दोनों पक्षों को सुनकर फैसला करती है.

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