पिछले कुछ समय में युवा लोगों को हार्टअटैक, कार्डियेक अरेस्ट होने के कई मामले सामने आ रहे हैं.

लोग ये बात करते हैं कि पहले जहां 50 की उम्र के बाद लोगों को अटैक पड़ते थे, वहीं अब 35-40 की उम्र में भी ऐसा होना कॉमन बात हो गया है. आखिर इसकी वजह क्या है?

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नई दिल्ली के मनीपाल हॉस्पिटल्स के कार्डिएक साइंसेज एवं प्रमुख कार्डियो वैस्क्यूलर सर्जन प्रमुख डॉ. युगल के. मिश्रा कहते हैं कि जीवनशैली में बदलाव और तेजी से होते शहरीकरण ने भारत में कार्डियेक बीमारियों को बढ़ावा दिया है.

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डॉ. युगल के. मिश्रा ने कहा, ‘दुनिया भर में कार्डियोवैस्क्युलर बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है और इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं, खास तौर पर विकासशील देशों में. एक विकासशील देश के तौर पर भारत में यही स्थिति है, इसके साथ ही भारत में पिछले तीन दशकों में कोरोनरी आर्टरी की बीमारियां दोगुनी हो गई हैं, जो विकसित देशों के मुकाबले बिलकुल उलट है, जहां ऐसे मामले 50 फीसदी कम हुए हैं’.

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उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों में लोगों को कम उम्र में डायबिटीज मेलिटस, उच्च रक्तचाप समेत कई ऐसी बीमारियां तेजी से हो रही हैं, जो पहले कम हुआ करती थीं.

(एजेंसी से इनपुट)

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