अक्‍सर ऐसा होता है कि बच्‍चा मोबाइल फोन लेकर बैठ जाता है. घंटों उस पर कुछ देखता रहता है. ये बात अब लगभग हर घर में कॉमन है. पर चिंता की बात ये है कि ज्‍यादातर माता-पिता ये जानते ही नहीं कि उनका बच्‍चा मोबाइल पर देख क्‍या रहा है? Also Read - भविष्य में 'मिनी' पढ़ाएगा बच्चों को किताब, बनेगा दोस्त-टीचर, ऐसे करेगा काम...

कुछ समय परहले एक सर्वेक्षण किया गया था. इसमें पाया गया था कि 60 फीसदी माता-पिता अपने बच्चों द्वारा देखे जाने वाले ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी नहीं करते, जो काफी चिंताजनक है. ये सर्वे किया क्लीसीफाइड मंच-ओएलएक्स ने. कंपनी ने ‘2019 इंटरनेट बिहैवियर सर्वे’ नाम से परिणाम जारी किए हैं.

ओएलएक्स द्वारा इंटरनेट का उपयोग करने वाले 26,000 से अधिक लोगों पर किया गया यह सर्वे ऑनलाइन और आमतौर पर सुरक्षा पर लोगों के नजरिये और व्यवहार को चिन्हित करता है. इसका लक्ष्य जागरूकता बढ़ाना है और इसने सभी यूजर्स, खासकर युवा यूजर्स से बेहतर इंटरनेट इकोसिस्टम के निर्माण में सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया है.

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सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े

सर्वे से पता चला कि इंटरनेट का उपयोग करने वाले अधिकांश लोग अपने व्यक्तिगत जीवन में साइबर सिक्योरिटी के सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों की जाने-अनजाने में उपेक्षा करते हैं. उनके बच्चे ऑनलाइन क्या कंटेंट देख रहे हैं, इस पर वे नजर नहीं रखते. 57 प्रतिशत लोगों ने माना कि ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, वे अपनी ईमेल आईडी और ऑनलाइन खातों को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं.

सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा रहा है कि 60 प्रतिशत परिजनों ने माना कि वे अपने बच्चों द्वारा ऑनलाइन देखे जाने वाले कंटेंट की निगरानी नहीं करते. यह काफी चिंता का सबब है क्योंकि जाने या अनजाने में ही बच्चे इंटरनेट का गलत उपयोग करते हैं और इसके परिणाम काफी गम्भीर होते हैं.

सर्वे में शामिल 67 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने किसी वेबसाइट पर साइन अप करते हुए या किसी उत्पाद का उपयोग करते समय नियम और शर्तों या अन्य सुरक्षा व लीगल गाइडलाइंस को स्किप किया है. 54 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने पिछले 6 माह से अधिक समय से अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के पासवर्ड नहीं बदले, जबकि 31 प्रतिशत को याद ही नहीं है कि उन्होंने पासवर्ड कब बदले थे.

सर्वे में शामिल 56 प्रतिशत लोगों ने अपनी प्रोफेशनल या सोशल मीडिया प्रोफाइल्स पर अपना मोबाइल नंबर आराम से शेयर किया. ऐसा तब है जब सोशल मीडिया साइट्स और बैंक अपने उपयोगर्ताओं या फिर ग्राहकों को समय-समय पर पासवर्ड बदलने की सलाद देते हैं और यह भी कहा जाता है कि पासवर्ड काफी स्ट्रांग होना चाहिए.

सुरक्षा के प्रति उपेक्षा दर्शाने वाले इन लोगों में हालांकि वित्तीय सुरक्षा के लिए बड़ी जागरूकता है. 68 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने अपने बैंक अकाउंट, सोशल मीडिया अकाउंट्स, लैपटॉप या फोन के लिए ओटीपी या पासवर्ड कभी किसी के साथ शेयर नहीं किया. ऐसा करना भी नहीं चाहिए क्योंकि इससे एकाउंट हैक होने का खतरा है.

ओएलएक्स इंडिया की निदेशक और जनरल काउंसेल लवण्या चंदन ने कहा, ‘इंटरनेट हमारे जीवन पर हावी हो गया है. इसलिए उसका उपयोग ऐसे करना कि हमारे जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो और वास्तविक संसार जैसी सावधानी रखकर सुरक्षित रहना, हमारे हित में है. सेफर इंटरनेट डे हमारी मनोवृत्ति और व्यवहार को परखने का उचित अवसर है, ताकि हमारी और हमारे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके’.

(एजेंसी से इनपुट)

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