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स्टील, नॉन-स्टिक या एल्युमिनियम किस धातु के बर्तन में बना खाना होता है औषधि समान?
हम रोज़ खाना बनाते हैं, लेकिन कम लोग जानते हैं कि बर्तन भी भोजन को दवा जैसा गुणकारी बना सकते हैं. जिस धातु में भोजन पकाया या परोसा जाए, वही उसके स्वाद, पोषण और शरीर पर असर को तय करती है. इसलिए सही बर्तन चुनना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना पौष्टिक सामग्री का इस्तेमाल करना.
सदियों से हमारे रसोईघर में सिर्फ स्वाद नहीं पकता, बल्कि सेहत भी तैयार होती है. आयुर्वेद मानता है कि जिस धातु में भोजन तैयार होता है, वही उसके गुण, ऊर्जा और पाचन क्षमता तय करती है. आज के आधुनिक किचन में अधिकतर लोग स्टील, नॉन-स्टिक या एल्युमिनियम पर निर्भर हैं, जबकि कई पारंपरिक धातुएं भोजन को औषधि जैसा पोषक बना देती हैं. सबसे लाभकारी धातुओं में पीतल का नाम प्रमुख है. यह शरीर की पाचन क्रिया को सक्रिय करने के साथ भोजन में मौजूद पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से अवशोषित होने में मदद करता है. पुराने जमाने में दाल और कढ़ी का स्वाद केवल इसलिए अलग नहीं था, बल्कि उसमें पोषक तत्व अधिक प्रभावी रूप में मिलते थे. आज भी पीतल के बर्तन रन-डे-टू-डे कुकिंग, खासकर दाल-सब्जी के लिए बेहद उपयोगी माने जाते हैं.
कांस धातु प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक
कांसा ऐसा धातु माना जाता है जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है. इसमें परोसा भोजन जल्दी खराब नहीं होता और इसे त्रिदोष संतुलन के लिए भी श्रेष्ठ माना गया है. कई शोध बताते हैं कि कांसे की थाली में भोजन करने वाले लोगों में पाचन शक्ति बेहतर पाई गई.
मिट्टी के बर्तन में धीमी आंच पर पकाएं
मिट्टी के बर्तन, धीमी आंच पर पकने के कारण भोजन के विटामिन और खनिजों को सुरक्षित रखते हैं. इन पात्रों में बनी दाल, बिरयानी या खिचड़ी में प्राकृतिक मिट्टी का खारापन भोजन को हल्का और सुपाच्य बनाता है. खास बात यह कि मिट्टी के मटके या बर्तन में जमाया दही अधिक पौष्टिक और प्रोबायोटिक गुणों से भरपूर होता है.
लोहे के बर्तन भी अनमोल
स्वास्थ्य की दृष्टि से लोहे के बर्तन भी अनमोल माने जाते हैं. इनकी कड़ाही में सब्ज़ी या दाल पकाने पर भोजन में आयरन की मात्रा स्वतः बढ़ जाती है, जो विशेष रूप से एनीमिया से जूझ रही महिलाओं के लिए लाभकारी है. तांबा मुख्य रूप से जल शोधन के लिए वरदान है. तांबे के पात्र में रखा पानी प्राकृतिक रूप से जीवाणुओं को नष्ट करता है और लीवर व पाचन तंत्र की सफाई में सहायक होता है. इसी तरह कांसे के बर्तनों में रखा पानी भी दूषित तत्वों को काफी हद तक समाप्त कर देता है.
वहीं दूसरी ओर एल्युमिनियम, नॉन-स्टिक और निम्न गुणवत्ता वाले स्टील के बर्तनों का अधिक उपयोग स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है, इसलिए इनसे बचना बेहतर माना गया है. यदि आप रोजाना इस्तेमाल होने वाले बर्तनों का थोड़ा बदलाव कर दें, तो आपका खाना ही शरीर की दवा बन सकता है.
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