पीरियड्स में महिलाओं को सिर क्यों नहीं धोना चाहिए, मंदिर जाने की मनाही क्यों? यहां जानें कारण

भारत में ऐसी कई मान्यताएं हैं जो सदियों से समाज का हिस्सा बनी हुई हैं. अलग-अलग धर्मों से जुड़ी ऐसी कई मान्यताएं हैं, जिन्हें धर्मों के नाम पर बांटा गया है. खासतौर पर महिलाओं को लेकर समाज ने न जाने कितने नियम-कायदे थोप रखे हैं. बचपन से ही लड़कियों को पाप-पुण्य की जंजीर से जकड़कर रखा जाता है. इन सबमें एक सबसे बड़ा टैबू यानी वर्जना पीरियड्स को लेकर है.

Published date india.com Published: January 9, 2024 2:51 PM IST
Periods में महिलाओं को सिर क्यों नहीं धोना चाहिए, मंदिर जाने की मनाही क्यों? यहां जानें कारण

पीरियड्स को लेकर न जाने कितनी धारणाएं समाज में बनाई गई हैं. वहीं हिन्दू धर्म में बचपन से ही लड़कियों को नियमों का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया जाता है. कई जगहों पर पीरियड्स के दौरान सोने से लेकर उठने तक का समय भी निर्धारित किया जाता है. पांच दिनों के इस सफर में महिलाएं घर में ही बेघर की तरह रहती हैं. उसे न किसी चीज को छूने की इजाजत होती है और न ही लोगों के बीच बैठ सकती है. कई जगहों पर तो ये भी धारणा है कि पीरियड्स में महिलाएं अगर मर्दों को छू लें तो मर्दों की उम्र कम हो जाती है. इसके अलावा मेंस्ट्रुएशन के समय रसोई में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जाती. मंदिर में प्रवेश करना वर्जित होता है. ऐसी कई मान्यताएं हैं जो बरसों से महिलाओं की जिन्दगी का हिस्सा बनी हुई हैं और हैरानी की बात तो यह है कि जीवन के लिए महत्वपूर्ण इस प्राकृतिक अवस्था को पुरुष प्रधान समाज में अशुद्धता का रूप माना जाता है.

समाज में फैली भ्रांतियां

पीरियड्स जैसे कठिन दौर में महिलाओं को अपवित्रता का टैग देकर मंदिर और पूजा-घर में जाने की मनाही होती है. ऐसा मानते है कि शरीर से गंदा खून निकलने की वजह से मंदिर अपवित्र हो जाता है. महिलाओं को पहले दिन चाण्डाली, दूसरे दिन ब्रह्मघातिनी और तीसरे दिन रजकी की भी संज्ञा दी गई है, लेकिन अच्छी बात ये है कि जैसे-जैसे समय बढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोगों की सोच बदल रही है.

द्रौपदी के चीर हरण की दास्तां

शास्त्रों के अनुसार पहले के समय महिलाओं को आराम करने के लिए समय नहीं मिल पाता था. जब महिला का रजोधर्म चक्र शुरू होता था, तब वह न तो खाना बनाती थी और न ही पूजा-पाठ करती थी. इस समय ज्यादा से ज्यादा आराम करने की सलाह दी जाती थी. यहीं वजह थी कि महाभारत के समय जब द्रौपदी रजोधर्म से थी, तो वह सबसे अलग रहकर आराम कर रहीं थी. रजोधर्म के उस चक्र में द्रौपदी का चीर हरण हो रहा था, तब श्री कृष्ण ने ही उनकी रक्षा की थी.

कामाख्या की कहानी

इसके अलावा असम के गुवाहाटी में कामाख्या मंदिर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां ब्लीडिंग गॉडेस की पूजा होती है. मान्यता है कि देवी सती की देह के साथ जब भगवान शिव तांडव कर रहे थे, उस समय भगवान विष्णु ने अपने चक्र से देवी सती की देह को 52 हिस्सों में बांट दिया था. जहां-जहां देवी सती के शरीर के अंग गिरे, वहां-वहां आज शक्ति पीठ हैं. उनकी योनी (गर्भ) का हिस्सा नीलाचल पहाड़ी में गिरा, तब से लेकर आज तक कामाख्या में उनके इसी अंग की पूजा होती है. माना जाता है कि माता कामाख्या तीन दिन तक मासिक धर्म से गुजर रही होती हैं, जिस वजह से एक सफेद कपड़ा दरबार में रख दिया जाता है और तीन दिन बाद जब दरबार खुलता है, तो वह कपड़ा लाल रंग से भीगा मिलता है. माता का मासिक धर्म वाला कपड़ा पवित्र मानकर प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को दिया जाता है.

मंदिर जाना क्यों वर्जित है?

इसके अलावा पहले के समय में लोग सुबह जल्दी उठकर पूजा-पाठ के लिए मंदिर जाते थे, ऐसे में जो भी महिला पीरियड्स से होती थी, उसका घर से बाहर निकलना असुरक्षित माना जाता था, क्योंकी जंगली जानवर खून की स्मेल से जल्दी अट्रेक्ट होते हैं, जिसकी वजह से जानवर उन पर हमला भी कर सकते हैं. यहां याद रखें कि भगवान का नाम लेना कहीं भी वर्जित नहीं है, मंदिर नहीं जाने की वजह ये भी है, क्योंकी मंदिर की वाइब्रेशन फ्रीक्वेंसी जितनी हाई होती है, पीरियड्स में बॉडी उतनी ही लो होती है, जिससे स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं भी हो सकती हैं, इसलिए इस समय आराम करना जरूरी होता है.

साइंटिफिक कारण भी जान लें

अगर इसके साइन्टिफिक कारण की बात करें तो पीरियड्स में बॉडी में तेजी से हार्मोनल चेंजेस के कारण 24 घंटों में यह दर्द बढ़ जाता है. इसकी वजह से महिलाओं में मूड स्विंग्स होना लाजमी है. इसके अलावा प्री-मेन्स्ट्रूअल सिंड्रोम और हाइजीन की दिक्कतों की वजह से भी महिलाएं बाहर निकलने के बजाय आराम करती हैं.

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सिर धोने की मनाही क्यों?

पीरियड्स में बाल धोने के लिए इसलिए मना किया जाता है क्योंकी इस दौरान बाल धोने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है और ब्लीडिंग खुलकर नहीं हो पाती, जिससे महिलाओं को सेहत से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं. इस वजह से ज्यादातर महिलाएं पीरियड्स के चौथे दिन बाल धोती हैं.

पीरियड्स, मेंस्ट्रुएशन साइकिल, माहवारी या रजोधर्म महिलाओं की जिन्दगी से जुड़ी एक नेचुरल प्रक्रिया है, जिसका समाज के किसी भी नियम-कायदे से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है. यह परमात्मा की इंसान को दी हुई सबसे बड़ी सौगात है, जिसके जरिए वह अपने पीढ़ी को आगे बढ़ा सकते हैं. जिसका शुक्रगुजार हर व्यक्ति को होना चाहिए.

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