नई दिल्ली: पूरी दुनिया हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के रूप में मनाती है. इस दिन की शुरूआत 2002 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ ने की थी. इस दिन को मनाए जाने का उद्देश्य लोगों को 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से श्रम न कराकर उन्हें शिक्षा दिलाने के लिए जागरूक करना है. हर साल 12 जून को विश्व दिवस बाल श्रमिकों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिक संगठनों, नागरिक समाज के साथ-साथ दुनिया भर के लाखों लोगों को जागरूक करता है और उनकी मदद के लिए कई कैंपेन भी चलाए जाते हैं. Also Read - चाइल्ड लेबर के आरोपी कपल के खिलाफ FIR रद्द, कोर्ट ने 100 पौधे लगाने का दिया आदेश

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12 जून को बाल श्रम की समस्या के खिलाफ विश्व दिवस के रूप में चिह्नित किया गया है और बाल श्रम की समस्या पर ध्यान दिया गया है ताकि इसे मिटाने या इसके खिलाफ लड़ने के तरीके खोजे जा सकें. बच्चों को जबरन श्रम में धकेल दिया जाता है, मादक पदार्थों की तस्करी और वेश्यावृत्ति जैसी अवैध गतिविधियों के लिए बच्चों को मजबूर किया जाता है. इस वजह से लोगों को बाल श्रम की समस्या के बारे में जागरूक करने और उनकी मदद करने के लिए इस दिवस को मनाया जाता है. Also Read - animated film modak trailer review it is based on child labour | गरीब बच्चे का मन जब उछाल मारता है तब क्या होता है...

वर्ल्ड डे अगेंस्ट चाइल्ड लेबर 2020 की थीम

हर साल वर्ल्ड डे अगेंस्ट चाइल्ड लेबर की थीम डिसाइड की जाती है. 2019 में इसकी थीम ‘बच्चों को खेतों में काम नहीं, बल्कि सपनों पर काम करना चाहिए’ रखी गई थी. ऐसे ही इल 2020 में इसकी थीम ”बच्चों को कोविड-19 महामारी” है. कोविड-19 महामारी के फैलने के कारण कई देशों में लॉकडाउन की स्थिति उत्पन्न हुई. इससे कई लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई और इस वजह से कई बच्चों की जिंदगी भी प्रभावित हुई है. ऐसी स्थिति में बहुत से बच्चों को बाल श्रम की ओर धखेला जा सकता है. इस वजह से बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस 2020 की थीम ”कोरोनावायरस के दौर में बच्चों को बचाना” है.